लखीसराय : 100 शय्या वाले सदर अस्पताल परिसर मे नवजात शिशु के देखभाल को लेकर स्थापित विशेष सुविधा युक्त न्यू बॉर्न केयर यूनिट अपने उद्देश्य की पूर्ति में विफल हो रहा है. जबकि इस यूनिट में पदस्थापित चिकित्सक व महिला स्वास्थ्यकर्मियों को छह-सात महीने से वेतन नही मिला है.
केयर यूनिट पूरी तरह एयरकंडीशन से सुसज्जित है. लेकिन इसके लिए विद्युत व्यवस्था मे भारी लोच है. एक तो जेनेरेटर संचालक ही नियुक्त नहीं है. किसी तरह यूनिट में प्रतिनियुक्त एएनएम द्वारा ही इसका संचालन किया जाता था. लेकिन इधर के दिनों में जेनेरेटर स्टार्ट करने के लिए प्रयुक्त बैटरी भी मरम्मति में चला गया है.
ऐसे में कभी भी कोई अप्रिय घटना घटित होने से बड़ा हंगामा खड़ा हो सकता है. बिजली कटते ही इसके सारे उपकरण यहां तक की ऑक्सीजन सप्लाय मशीन भी कार्य करना बंद कर देता है. ऐसे में इसमें रखे शून्य से 28 दिन तक के नवजात शिशुओ की रक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है. नवजात शिशु के परिजनों को ठंड, गरमी या बारिश के मौसम में यूनिट के बाहर खुले आसमान के नीचे रहना पड़ता है. इन लोगों के लिए एक अदद शेड भी उपलब्ध नहीं है.
न्यू बॉर्न केयर यूनिट में छह नर्स नियुक्त हैं व छह नर्स प्रतिनियुक्त हैं. इन सभी का वेतन आवंटन के अभाव में छह महीने से लंबित पड़ा है. यहां पदस्थापित नर्स मेरी सोरेन का सितंबर माह से वेतन लंबित रहने से घोर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. जबकि शिशु रोग विशेषज्ञ यूनिट प्रभारी डॉ राकेश कुमार को भी अगस्त माह से वेतन के लाले पड़े हुए हैं. हद तो यह है कि 100 शय्या वाले अस्पताल के अधिकांश नर्स को क्वार्टर के अभाव में अन्यत्र किराये के मकान में रहना पड़ता है. जिससे वेतन के अभाव मे परेशानी व बढ़ जाती है.
बोले अधिकारी
सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि इमरजेंसी में यूनिट को बिजली अस्पताल के जेनेरेटर से दी जाती है. जबकि सिविल सर्जन मद मे राशि आवंटन न रहने से वेतन लंबित है. इस संबंध मे लगातार राज्य स्वास्थ्य समिति से पत्राचार किया जा रहा है.
