सुरक्षा मानकों को नजरंदाज करते हुए किऊल रेल पुल पर मरम्मत का कार्य किया जा रहा है. इसमें घरेलू रसोई गैस का उपयोग किया जा रहा है. इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
लखीसराय : किऊल रेल पुल जर्जर हो जाने के कारण विभाग के द्वारा लाखों रुपये खर्च कर उसकी मरम्मती कराने का निर्देश दिया गया लेकिन स्थानीय ठेकेदार कुछ रुपये बचाने के चलते घरेलू गैस का उपयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं. ज्ञात हो कि रेलवे लाइन के आसपास गैस रखना दंडनीय अपराध है. इसके लिए प्रचार-प्रसार में लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं.
बावजूद इसके सभी आदेश को ताक पर रख कर अति ज्वलंत सामग्री को पुल पर लगा कर उससे पुल मरम्मत का कार्य किया जा रहा है, जबकि इस पुल से मरम्मत के समय भी रेल परिचालन होते रहता है. अगर भूलवश किसी कारण गैस लिकेज से या अन्य कारणों से उसमें आग लगती है तो रेल विभाग को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.
गैस सिलिंडर को रस्सी से बांध कर रखा गया है जिससे अगर किसी प्रकार का हादसा होता है तो उसे फेकना भी संभव नहीं हो सकता है. जबकि नियम के अनुसार गैस सिलेंडर को पुल के नीचे लगा कर पाईप के सहारे गैस की आपूर्ति की जानी चाहिए,
जिससे गैस सिलिंडर में किसी तरह की दुघर्टना होने से क्षति कम हो सके. इस कार्य में सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा जा रहा है. इस संबंध में किऊल के एइएन पदाधिकारी ने कहा कि पुल का मरम्मती कार्य हेडक्वार्टर के अधीन किया जा रहा है. इस संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी हाजीपुर के प्रोजेक्ट इंजिनियर ही दे सकते हैं. सेफ्टी से संबंधित बात है जिसकी जानकारी वरीय पदाधिकारी को दे दी जायेगी. पुल मरम्मती कार्य में सेफ्टी जरूरी है.
