प्रतिनिधि : चानन सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र के मलिया पंचायत में पड़ने वाला मलिया गांव आजादी के इतने दिन बीत जाने के बाद भी विकास की रोशनी से कोसों दूर है. इस गांव में लगभग 125 घरों में 560 की आबादी निवास करती है.
इतनी बड़ी आबादी आज भी जब अपने घरों से बाहर निकलते हैं ता इन्हें कीचड़ भरे रास्ते से होकर प्रत्येक दिन आना जाना पड़ता है. विकास के नाम पर 2-3 चापाकल तथा सामुदायिक भवन निर्मित है. जलनिकासी यहां की प्रमुख समस्या में एक है.
हाल फिलहाल एक नाली तथा गली में खरंजा का निर्माण मुखिया के द्वारा किया गया जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में पड़ा है. यहां अधिकतर घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है
.खुले में शौच करना इनकी मजबूरी बनी हुई है. सिंचाई के लिए अधिकतर किसान प्रकृति पर ही निर्भर करते हैं. रही बात बिजली की तो आसमान से तारे तोड़ने के बराबर है. ग्रामीण राधेश्याम महतो ने बताया कि यह गांव वर्षों से उपेक्षित रहा है जो भी इस गांव का प्रतिनिधित्व किया सभी ठगने का का काम किया है.
यहां के अधिकतर आबादी कृषि पर निर्भर करती है लेकिन सिंचाई सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. उन्होंने कहा कि गांव के लोग सरकार द्वारा क्रियान्वित योजनाओं से वंचित है. सुमित यादव ने कहा कि सिर्फ चुनाव के वक्त ही नेताजी विकास की बात करते हैं. चुनाव खत्म होने पर किसी ने सुधि लेना मुनासिब नहीं समझते हैं. धर्मवीर मेहता ने बताया कि यहां के डीलर राशन में कम देते हैं और पैसा अधिक लेते हैं.
दर्जनों लोग नि:शक्त, वृद्धा, विधवा पेंशन से वंचित है. जागो यादव ने कहा कि इस गांव का कोई भी गली में पीसीसी ढ़लाई नहीं किया गया है जिससे लोगों को बारिश में दिनों में कीचड़ से होकर आना जाना पड़ता है. धु्रव यादव ने कहा कि लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है. जिससे उच्च वे लोग उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं.
