करीब 10 करोड़ का होगा कारोबार

प्रतिनिधि, लखीसराय श्रवणी मेला आज से शुरू हो रहा है. मेला को लेकर बाजार में रौनक दिखने लगी है. श्रवणी मेले से संबंधित समान जैसे कपड़ा, अगरबत्ती आदि का व्यवसायियों ने स्टॉक कर लिया है. बाजार में केसरिया व सफेद वस्त्रों की भरमार है. वहीं कांवरिया भी देवघर के लिए कूच करने लगे हैं. बाजार […]

प्रतिनिधि, लखीसराय

श्रवणी मेला आज से शुरू हो रहा है. मेला को लेकर बाजार में रौनक दिखने लगी है. श्रवणी मेले से संबंधित समान जैसे कपड़ा, अगरबत्ती आदि का व्यवसायियों ने स्टॉक कर लिया है. बाजार में केसरिया व सफेद वस्त्रों की भरमार है. वहीं कांवरिया भी देवघर के लिए कूच करने लगे हैं.
बाजार में छायी हरियाली
सावन का महीना आते ही सुहागिन महिलाओं में हरी साड़ियों व हरी चूड़ियां, लहठी पहनने का चलन है. इसे लेकर बाजार में अलग-अलग तरह की हरी साड़ियां सजा दी गयी है. वहीं चूड़ी व लहठी दुकानों पर हरे रंग की चूड़ियां व लहठी दिखने लगी है. कपड़ा व्यवसायी संजय अग्रवाल ने बताया कि सावन में हरी साड़ियों की बिक्री 30 फीसदी बढ़ जाती है. हरे रंग की सूती साड़ी 300 से 400 रुपये तक में तथा सिंथेटिक साड़ी 500-600 तक बिक्री के लिए उपलब्ध है.
हरे रंग की चूड़ी-लहठी की विशेष डिमांड
चूड़ी व मनिहारा व्यवसायी श्रवण लहेरी के मुताबिक सावन माह में हरे रंग की चूड़ी व लहठी की विशेष डिमांड होती है. इसके लिए आकर्षक डिजाइन में कांच की चूड़ी व लहठी का स्टॉक किया गया है. प्लेन लहठी 40 रुपये प्रति दर्जन बिक्री के लिए उपलब्ध है. प्लेन चूड़ी प्रति डिब्बा 16 से 20 रुपये मिल रही है, जबकि फैंसी चूड़ी 20 रुपये से 80 रुपये प्रति डिब्बा तक की है. इसमें आकर्षक स्टोन वर्क किया होता है. चांदनी हरी प्लेन चूड़ी 20 रुपये डिब्बा व नाचे मयूरी रेशम सेट चूड़ी 70 रुपये प्रति सेट उपलब्ध है. सावन माह में शहर में चूड़ी लहठी का एक करोड़ का कारोबार होने की संभावना है.
कांवरिया कपड़े से सज गयीं दुकानें
सावन माह आते ही शहर में 100 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानों में कांवरियों के लिए कपड़ा बेचने का काम शुरू हो जाता है. एक कपड़ा दुकान में औसतन पांच से 10 हजार रुपये तक का प्रतिदिन कारोबार होता है. कांवरिया अपने कपड़े में हाफ पैंट, गंजी, टी-शर्ट, गमछा, साड़ी व सलवार सूट की खरीदारी करते हैं. सावन माह में इन कपड़ों की बिक्री अन्य दिनों की तुलना में 10 गुनी बढ़ जाती है. कपड़ा व्यवसायी दिनेश अग्रवाल के मुताबिक सावन माह में कपड़े की बिक्री 30 से 40 फीसदी बढ़ जाती है. अधिकांश महिलाएं 300 से 400 रुपये तक की सूती साड़ी की खरीदारी करती हैं. शहर में औसतन दो करोड़ का कपड़े का कारोबार होने की संभावना है.
प्रसाद की 50 से अधिक दुकानें लगती हैं
शहर के प्रसिद्ध अशोक धाम में सावन माह में शिवभक्तों का तांता लगा होता है. सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए जाना जाता है. इस पवित्र माह में सैकड़ों परिवार को रोजी-रोटी मिलती है. अशोक धाम मंदिर के आसपास सावन माह में प्रसाद की 50 से अधिक दुकानें सजती है. सावन माह में पांच लाख शिवभक्त भगवान भोले शंकर का जलाभिषेक करते हैं. यहां आने वाला कांवरिया पूजन सामग्री, प्रसाद के रूप में चूड़ा, इलायची दाना व पेड़ा की खरीदारी करते हैं. यदि एक कांवरिया 100 से 150 रुपये का भी प्रसाद लेता है तो अशोक मंदिर के आसपास स्थित प्रसाद दुकानों से छह करोड़ तक का प्रसाद बिकता है.
कांवर की भी होती है जम कर बिक्री
जलाभिषेक करने के लिए शहर में कांवर का कारोबार होता है. कच्चे बांस से कांवर तैयार करने से लेकर उसे सजाने तक में दर्जन भर कारोबारी पूरे सावन महीने व्यस्त रहते हैं. लगभग पांच लाख के कांवर का कारोबार होने का अनुमान है.
सोमवारी के दिन बढ़ जाती है फल की डिमांड
सावन के पवित्र महीने में फल का कारोबार कई गुना बढ़ जाता है. शहर के 100 से अधिक छोटे-बड़े दुकानों में फल की बिक्री होती है. एक दुकानदार औसतन दो से तीन हजार रुपये का फल प्रतिदिन बेच लेता है. सोमवारी के दिन फल की काफी डिमांड होती है. पूरे महीने एक करोड़ का फल का कारोबार होने का अनुमान है.
चाय-पान व नाश्ते की दुकानों में भी कई गुना बढ़ जाती है भीड़
सावन माह में मुख्य मार्ग पर स्थित चाय-पान व नाश्ते की दुकानों में भी कारोबार चार से पांच गुना बढ़ जाता है. मार्ग से होकर गुजरने वाले कांवरिया वाहन की संख्या अचानक काफी बढ़ जाती है. कई दुकानें सावन माह में रात भर खुली होती है. जहां कांवरिया के ठहरने की भी व्यवस्था होती है.

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