खुशबू की तरह लाखों लड़कियां खुले में शौच को हैं विवश, जिल्लत ङोल रहीं महिलाएं

लखीसराय. प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन योजना चलायी जा रही है. प्रचार-प्रसार कर लोगों को शौचालय बनवाने के लिए तरह-तरह के अनुदान योजनाओं का लाभ लेने का अनुरोध किया जा रहा है. वहीं आज भी जिले में कुल 2 लाख 2 हजार 450 घरों में से एक लाख 47 हजार घरों में शौचालय नहीं है. जिले […]

लखीसराय. प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन योजना चलायी जा रही है. प्रचार-प्रसार कर लोगों को शौचालय बनवाने के लिए तरह-तरह के अनुदान योजनाओं का लाभ लेने का अनुरोध किया जा रहा है. वहीं आज भी जिले में कुल 2 लाख 2 हजार 450 घरों में से एक लाख 47 हजार घरों में शौचालय नहीं है.

जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए अब तक जो भी प्रयास हुआ है वह कागजी ही साबित हुआ. धरातल पर योजनाओं का क्रियान्वयन शायद ही किसी क्षेत्र में सही ढंग से हो पाया. आज भी जिले के 72.6 प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं होने के कारण महिलाएं खुले में शौच जाने को मजबूर हैं. महिलाओं को शौच के लिए अंधेरा होने का इंतजार करना पड़ता है. अक्सर उन्हें शर्मिदगी उठानी पड़ती है.

सड़क किनारे बसे गांव की महिलाएं शाम ढलने के बाद शौच के लिए घर से बाहर आती हैं. अक्सर सड़क किनारे वाहनों की हेडलाइट से उन्हें परेशानी होती है. कई बार शौच के लिए निकली महिलाएं हादसे का शिकार होती हैं. लज्जावश अक्सर महिलाएं अभिभावकों से इसकी शिकायत भी नहीं कर सकती. उन्हें जान भी गंवानी होती है. एक सप्ताह पूर्व दुमका (झारखंड) के दुधानी पंचायत गोशाला रोड शास्त्रीनगर मुहल्ले में एक 17 वर्षीय किशोरी खुशबू ने घर में शौचालय नहीं होने की वजह से आत्महत्या कर ली. यह खबर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहा.

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