लखीसराय के उतरोत्तर विकास की जगी उम्मीद

25 नवंबर को मुख्यमंत्री ने लाली पहाड़ी पहुंच किया था खुदाई का कार्य का शुभारंभ अब तक की खुदाई में मिले हैं बौद्ध महाविहार के कई साक्ष्य भगवान की खंडित प्रतिमा, अलंकृत पिलर, बौद्धकालीन मुहर सहित अनेक अवशेष बौद्ध भिक्षुओं के रहने के मिले हैं 17 कक्ष खुदाई से मिलने वाली दुर्लभ सामग्रियों के लिए […]

25 नवंबर को मुख्यमंत्री ने लाली पहाड़ी पहुंच किया था खुदाई का कार्य का शुभारंभ

अब तक की खुदाई में मिले हैं बौद्ध महाविहार के कई साक्ष्य
भगवान की खंडित प्रतिमा, अलंकृत पिलर, बौद्धकालीन मुहर सहित अनेक अवशेष
बौद्ध भिक्षुओं के रहने के मिले हैं 17 कक्ष
खुदाई से मिलने वाली दुर्लभ सामग्रियों के लिए अभी तक नहीं हो सकी है संग्रहालय की व्यवस्था
लखीसराय : वैसे तो जिले में पौराणिक काल के अनेक साक्ष्म मिलते आ रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा लाली पहाड़ी की खुदायी को हरी झंडी दिये जाने के बाद वहां पर खुदायी से मिलने वाले बौद्धकालीन अवशेषों की वजह से अब लखीसराय के उतरोत्तर विकास की उम्मीद जगी है. लोगों के अनुसार लाली पहाड़ी लखीसराय के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है, लेकिन प्रशासन का ध्यान इस ओर पूर्णरूप से नहीं दिया जा रहा है.
खुदायी से प्राप्त होने वाली दुर्लभ वस्तुओं के लिए जिला प्रशासन ने अभी तक एक संग्रहालय तक की व्यवस्था नहीं कर सका है. वर्तमान समय में जो भी सामग्री मिल रही है उसमें अति दुर्लभ सामग्रियों को कवैया थाना को ही सुपुर्द किया जा रहा है.
यहां बता दें कि विगत वर्ष 25 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं हेलीकॉप्टर से लाली पहाड़ी पहुंच खुदायी कार्य का शुभारंभ किया था. जिसके बाद बिहार विरासत बचाओ समिति एवं विश्वभारती शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय कोलकाता के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो़ अनिल कुमार के देख रेख में 13 दिसंबर से खुदायी कार्य पूर्णरूप से शुरू किया गया था, जिसमें शांतिनकेतन विश्वविद्यालय के पांच शोधकर्ता छात्र-छात्राएं अपनी निगरानी में काफी बारीकियों के साथ खुदायी का कार्य को अंजाम देने में लगे हैं.
विगत तीन माह से जारी लाली पहाड़ी की खुदायी कार्य के दौरान अब तक बौद्ध महाविहार के कई अनेक साक्ष्य देखने को मिले हैं. जिसमें भगवान बुद्ध की छोटी प्रतिमा, बौद्ध मंदिर में लगने वाले अलंकृत पिलर, बौद्धकालीन मुहर, दान करने के दौरान इस्तेमाल किये जाने वाले अभिलेख सहित अनेक दुर्लभ वस्तुएं प्राप्त हुई. जिसे कवैया थाना को सुपुर्द किया गया. इसके अलावा भी अनेक छोटे-बड़े पत्थरों व मिट्टी के बर्तन, मिट्टी की मालाएं भी बरामद की गयी हैं जो पहाड़ी पर ही बने रंगकला मंच के कमरों में रखी जा रही है.
खुदायी कार्य की देख रेख कर रहे प्रो़ अनिल के अनुसार अब तक खुदायी के दौरान मिली वस्तुओं से यह पूर्णरूप से प्रमाणित होता है कि यह जिला बौद्धमहाविहार से जुड़ा था. वैसे इसका उल्लेख पूर्व में मिलता रहा है. लेकिन अब खुदायी कार्य से मिले वस्तुओं से इसकी प्रमाणिकता साबित हो गयी है. उन्होंने बताया कि लखीसराय में लाली पहाड़ी के अलावा उरैन की पहाड़ी, बिछवे पहाड़ी, बालगुदर टीला, नोनगढ़, घोसीकुंडी में भी अगर सही रूप से खुदायी कार्य करायी जाय तो यह जिला आने वाले समय में पर्यटन के क्षेत्र में काफी प्रचलित हो सकता है.
वहीं स्थानीय विधायक सह श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा, जिला परिषद अध्यक्ष रामाशंकर शर्मा, भाकपा जिला सचिव कॉ जीतेंद्र कुमार, अधिवक्ता रवि विलोचन वर्मा, अधिवक्ता रामबिलास सिंह आदि की मानें तो वह दिन दूर नहीं जब लखीसराय देश तो क्या दुनिया के मानचित्र पर अपना एक महत्वपूर्ण स्थान बनाएगा और यही लाली पहाड़ी लखीसराय के विकास में मील का पत्थर साबित होगा. जिला मुख्यालय स्थित बहुचर्चित लालपहाड़ी की खुदाई ज्यों ज्यों अपने प्रगति पथ पर अग्रसर हो रही है त्यों त्यों खुदाई से प्राप्त भग्नावशेष पुरातत्व वेत्ता को प्रोत्साहित कर रही है. वहीं आलोचकों के मुंह की बोलती भी धीमी पड़ती जा रही है.
ऐसे तो प्राचीन भारत के इतिहास को जानने वाले के विद्वानों का खुदाई स्थल का दौरा के साथ बड़ी ही बारीकी से अध्ययन किया जा चुका है और किया भी जा रहा है. स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी अमित कुमार व पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार का खुदायी स्थल पर लगातार दौरा जारी है.

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