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Bihar Election 2020: औवैसी के आने से सीमांचल में उलटफेर की संभावना, इन सीटों पर मुकाबला होगा दिलचस्प...

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
असुद्दीन ओवैसी
असुद्दीन ओवैसी
(फाइल फोटो )

अजीत,भागलपुर: सीमांचल के रास्ते बिहार में पहली बार किशनगंज सीट जीत कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाली एआइएमआइएम (मीम) ने इस बार के विस चुनाव का परिदृश्य बदल दिया है. उत्तर बिहार के यादव नेता देवेंद्र प्रसाद यादव की पार्टी के साथ तालमेल कर ओवैसी ने अपने साथ यादव मतदाताओं को भी गोलबंद करने की कोशिश की है. पिछले विस चुनाव में एआइएमआइएम ने सीमांचल की छह सीटों पर चुनाव लड़ा था. लेकिन, एक भी सीट पर जीत नहीं हुई. पांच सीट पर जमानत भी जब्त हो गयी. इसके बाद किशनगंज विधायक डॉ जावेद के सांसद बन जाने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ, तो एआइएमआइएम के कमरूल होदा ने जीत दर्ज की. इस जीत के बाद एआइएमआइएम के हौसले बुलंद हैं.

एआइएमआइएम की मौजूदगी में कई सीटों पर नये समीकरण का बनना तय

राजनीतिक जानकारों की मानें, तो इस बार एआइएमआइएम की मौजूदगी में कई सीटों पर नये समीकरण का बनना तय है. हालांकि, हाल के दिनों में अपने-अपने क्षेत्र के कई दिग्गजों का मीम के शामिल होना भी यह बताने के लिए काफी है कि सीमांचल की चार जिलों की कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होनेवाला है. खासकर 69 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले किशनगंज जिले में असदुद्दीन ओवैसी बड़े उलटफेर की तैयारी में है. हालांकि, अभी दो दिन पहले ही पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव व एआइएमआइएम के सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी के बीच गठबंधन हुआ है. जिससे ये कयास लगाये जा रहे हैं कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इनका गठबंधन चुनावी समर में उतर सकता है.

किशनगंज सदर सीट पर खुल चुका है खाता

कोसी-सीमांचल की मुस्लिम बहुल आबादी वाले क्षेत्रों में ही इस बार प्रत्याशी देने की तैयारी की है. क्योंकि, 2015 के विस चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने सीमांचल के रास्ते बिहार में अपनी जमीन की तलाश शुरू की. हालांकि, 2019 के लोस चुनाव में उनके प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान को किशनगंज में तीसरे नंबर से संतोष करना पड़ा. लेकिन, 6 महीने बाद ही किशनगंज सदर सीट पर ओवैसी के पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर बिहार में एआइएमआइएम का खाता खुलवा दिया.

मुस्लिम बहुल सीट पर प्रत्याशी देने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार अब तक की जिन सीटों पर प्रत्याशी देने का फैसला हुआ है उनमें कोसी-सीमांचल की एक दर्जन से अधिक सीटें हैं. इनमें कटिहार की बलरामपुर, बरारी, कदवा, मनिहारी, पूर्णिया जिला में अमौर व बायसी, अररिया में जोकीहाट, अररिया सदर व नरपतगंज, खगड़िया संसदीय क्षेत्र की सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा जिला), किशनगंज की चारों विस सीटें किशनगंज, कोचाधामन, बहादुरगंज व ठाकुरगंज व सुपौल की छातापुर विधानसभा सीट शामिल हैं. इधर, हाल के दिनों में कई चर्चित चेहरों ने भी एआइएमआइएम का दामन थाना है. इसमें बहादुरगंज से पूर्व में विस चुनाव लड़ चुके मुसब्बिर आलम जाप छोड़ कर शामिल हुएहैं. इसके अलावा बायसी के पूर्व विधायक रुकनुद्दीन आदि शामिल हैं.

11-11 पर एनडीए व महागठबंधन और एक-एक सीट पर मीम व माले का कब्जा

सीमांचल के चार जिलों में 24 विस सीट हैं. इनमें वर्तमान में 11 सीट पर एनडीए, 11 पर महागठबंधन व एक-एक सीट पर मीम व सीपीआइ (माले) का कब्जा है. अररिया की छह विस सीटों में वर्तमान में तीन पर महागठबंधन का कब्जा हैं, तो तीन पर एनडीए. नरपतगंज व जोकीहाट विस सीट पर राजद का कब्जा है. अररिया सीट पर कांग्रेस के विधायक हैं. सिकटी व फारबिसगंज में भाजपा, जबकि रानीगंज सीट पर जदयू का कब्जा है. किशनगंज की चार सीटों में किशनगंज में एआइएमआइएम, बहादुरगंज में कांग्रेस व कोचाधामन व ठाकुरगंज में जदयू का कब्जा है. कटिहार की बलरामपुर सीट पर माले, कदवा, मनिहारी व कोढ़ा में कांग्रेस, बरारी में राजद, प्राणपुर व कटिहार सीट पर भाजपा का कब्जा है. पूर्णिया जिले की सात सीटों में पूर्णिया व बनमनखी में भाजपा, रुपौली व धमदाहा में जदयू, कसबा व अमौर में कांग्रेस व बायसी में राजद का कब्जा है.

Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya

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