दशा सुधारने के हुए प्रयास पर स्थिति है जस की तस

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पूर्व के डीएम ने भी रमजान नदी को अतिक्रमण मुक्त करने को लेकर की थी पहल

किशनगंज : रमजान को अतिक्रमण मुक्त करा कर उसकी धारा को अविरल बनाये जाने का जिला प्रशासन का यह पहला प्रयास नहीं है़ जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित से पहले भी कई जिला पदाधिकारी रमजान नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने का प्रयास कर चुके हैं . लेकिन वे सफल नहीं हो सके थे़ अतिक्रमण हटाने के लिए नापी की कार्रवाई शुरू ही होती है कि अवरोध पैदा हो जाता है़ हालांकि प्रशासन अगर इस कार्य को अंजाम तक ले जाने के लिए कमर कस ले तो इसे सही तरीके से पूरा किया जा सकता है. लेकिन प्रशासनिक अमले के ही अधिकारी व कर्मचारी जो इसकी जड़ में हैं यदि यही निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए काम करने के बजाय बिगाड़ने का तिड़कम करने लगे तो कार्य में असफलता ही हाथ लगेगी़ रमजान नदी प्रकरण में कुछ ऐसा ही हो रहा है़
जिसके कारण शहरवासियों की दशकों पुरानी मांग पूरी नहीं हो पा रही है. निवर्तमान सांसद शहनवाज हुसैन एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री व वर्तमान में अररिया के सांसद तस्लीमउद्दीन की पहल पर वर्ष 1998-99 में जिला पदाधिकारी रहे, आरएसबी सिंह ने रमजान नदी की साफ सफाई एवं सौंदर्यीकरण के लिए प्रयास शुरू किया था़ योजना बनी ही थी कि धन्नासेठ अतिक्रमणकारियों एवं भू माफियाओं ने योजना पर पानी फेर दिया़ इसके बाद वर्ष 2008 से 2010 तक डीएम रहे फेराक अहमद ने रमजान नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कार्रवाई प्रारंभ की. नापी कर अतिक्रमणकारियों को चिन्हित भी कर दिया गया फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया़
जिले में जब भी कोई नया डीएम जिले का कार्यभार संभालता तो बुद्धिजीवियों एवं समाज सेवियों की ओर से उनका ध्यान रमजान नदी की दुर्दशा की आकृष्ट कराया जाता है. इसी प्रकार वर्ष 2014-15 में डीएम रहे अनिमेष कुमार पराशर ने रमजान नदी मामले को गंभीरता से लेते हुए रमजान नदी प्रकरण को लेकर 4 दिसंबर 2014 को जिले के बुद्धिजीवियों समाज सेवियों एवं गणमान्य व्यक्तियों के साथ बैठक की़ इसके उपरांत डीएम श्री पराशर ने तत्कालीन उप समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, नप कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर रमजान नदी का कोड मार्किग एवं अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया़
वहीं नदी की धारा अविरल बहे इसके लिये जल नि:सरण अभियंता को आवश्यक निर्देश दिये़ लेकिन तत्कालीन जल नि:सरण कार्यपालक अभियंता ने अपने जांच रिपोर्ट में कहा कि रमजान नदी का उद्गम स्थल डोंक नदी से रजमान नदी 20 फीट उंची है़ इसलिए डोंक नदी से पानी नहीं आ पा रहा है़ यदि उद्गम स्थल के पास डोंक नदी से मिला भी दिया जाये तो खगड़ा ब्रिज के आगे पानी का बहाव नहीं होगा़ हालांकि जब बरसात के समय रमजान नदी में पानी आता है तो आराम से बह कर आगे बंगाल की ओर चला जाता है़ ऐसे में अभियंताओं के जांच रिपोर्ट पर भी लोगों को संशय है़
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