किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत डाकपोखर पंचायत के वार्ड संख्या-4 स्थित वेणुगढ़ गांव में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है. गांव में पक्की सड़क और जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम) की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मानसून के दौरान पूरा क्षेत्र जलजमाव की चपेट में आ जाता है. स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि ग्रामीणों को रोजाना घुटने भर गंदे पानी से होकर आवागमन करना पड़ रहा है, जिससे उनका जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है.
घुटने भर पानी से निकलने को विवश ग्रामीण व स्कूली बच्चे
वेणुगढ़ गांव में जल निकासी का कोई पुख्ता माध्यम न होने से थोड़ी सी बारिश में ही पानी रास्तों और घरों के आसपास जमा हो जाता है:
- आवागमन ठप: रास्तों पर जलभराव के कारण ग्रामीणों का घर से निकलना दुश्वार हो गया है.
- बच्चे और बुजुर्ग परेशान: सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को हो रही है. दैनिक जरूरतों का सामान लेने के लिए भी लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है.
"आवेदन के बावजूद प्रशासन बेखबर" — शंकर मोहन दास
वार्ड सदस्य प्रतिनिधि शंकर मोहन दास ने बताया कि गांव की इस विकट समस्या से जनप्रतिनिधि और अधिकारी पूरी तरह वाकिफ हैं:
- बार-बार दिया आवेदन: स्थानीय निवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा कई बार ग्राम पंचायत के मुखिया एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को लिखित आवेदन देकर पक्की सड़क व नाला निर्माण की मांग की गई.
- आश्वासन ही मिला: प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते अब तक धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हो सका है, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है.
मच्छरों का प्रकोप बढ़ा, संक्रामक बीमारियों की आशंका
गांव में लंबे समय से ठहरे गंदे पानी की वजह से मच्छरों की तादाद में भारी इजाफा हुआ है:
- स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: ग्रामीणों को डर है कि जलजमाव के कारण गांव में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और त्वचा रोग जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं.
- प्रशासन से गुहार: स्थानीय लोगों ने किशनगंज जिला प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से अविलंब संज्ञान लेते हुए गांव में पक्की सड़क और पक्के नाले का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि लोगों को नरकीय जीवन से मुक्ति मिल सके.
