ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Tulsiya Halt Railway Station: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रणनीतिक और भौगोलिक दृष्टिकोण से मुस्तैद किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड अंतर्गत ‘तुलसिया हॉल्ट’ अपनी पहचान और बुनियादी अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है. नवसंशोधित ठाकुरगंज–अररिया नई रेल लाइन परियोजना के चालू होने के बाद से ही इस हॉल्ट पर यात्रियों का दबाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है. वर्तमान में यहाँ आधुनिक स्टेशन भवन, ऊंचा प्लेटफॉर्म, फुट ओवरब्रिज (FOB) सहित तमाम तकनीकी कड़ियां स्टेशन जैसी मुस्तैद हैं, लेकिन रेलवे बोर्ड के दस्तावेजों में इसे अब भी केवल एक ‘हॉल्ट’ के रूप में ही संधारित किया गया है. इस विसंगति के कारण सीमांचल के लाखों कली-मजदूरों, छात्रों और व्यापारियों को कई प्रमुख एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
विधायक गोपाल अग्रवाल ने संभाली कमान; राज्यसभा सांसद को प्रेषित किया पत्र
- संजय झा से हस्तक्षेप की मांग: स्थानीय ठाकुरगंज विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने इस जनसमस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्यसभा सांसद व जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा है. विधायक ने पत्र में कमान साफ करते हुए लिखा है कि संपूर्ण दिघलबैंक प्रखंड के प्रक्षेत्र में तुलसिया ही एकमात्र ऐसा रेलवे ठहराव स्थल है, जो सीमावर्ती गांवों की लाइफलाइन बन चुका है.
- राजस्व में भारी बढ़ोतरी: सोमवार को तुलसिया हॉल्ट के प्लेटफॉर्म पर कतारबद्ध खड़े सैकड़ों कनिष्ठ व वरिष्ठ यात्रियों की लाइव भीड़ ने इस मांग की हकीकत को बयां किया. सीमावर्ती टप्पू बाजार के निकट होने के कारण इस हॉल्ट से रेलवे को हर महीने लाखों रुपये का सीधा राजस्व मिल रहा है, फिर भी इसे पूर्ण स्टेशन में अपग्रेड न करना समझ से परे है.
नेपाल सीमा से सटा है क्षेत्र; शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार का मुख्य संबल
“तुलसिया की कड़ियां सीधे नेपाल बॉर्डर से जुड़ती हैं. सुदूर ग्रामीण इलाकों में कल-कारखाने न होने से यहाँ का युवा वर्ग और किसान शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए पूरी तरह इसी रेल सेवा पर आश्रित हैं. हॉल्ट का दर्जा होने की तकनीकी सीमा के कारण लंबी दूरी की ट्रेनें यहाँ बिना रुके गुजर जाती हैं, जिससे सीमावर्ती विकास की गति मंद पड़ी है.”
स्टेशन का दर्जा मिलने से खुलेंगे विकास के द्वार; रेल मंत्रालय पर टिकी निगाहें
विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल के अनुसार, यदि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) द्वारा तुलसिया को पूर्ण रेलवे स्टेशन का दर्जा संधारित कर दिया जाता है, तो यहाँ ट्रेनों के क्रॉसिंग और अतिरिक्त लूप लाइन की तकनीकी कड़ियां जुड़ सकेंगी. इससे न केवल अधिक ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रेलवे स्टाफ की मुस्तैदी से सुरक्षा चक्र भी मजबूत होगा.
अब पूरा सीमांचल और दिघलबैंक प्रक्षेत्र इस बात का इंतजार कर रहा है कि विधायक की इस कड़क पैरवी और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद रेल मंत्रालय तुलसिया हॉल्ट की इस पुरानी पुकार को कब स्वीकार करता है. यदि इस मांग पर अंतिम मुहर लगती है, तो यह नेपाल सीमा से सटे हजारों नागरिकों के लिए नए आर्थिक संबल का अध्याय साबित होगा.
