ठाकुरगंज (किशनगंज). ठाकुरगंज में तीन दिनों से चल रहे साधना शिविर का रविवार को विशेष कार्यक्रम के साथ समापन हुआ. आनंदमार्ग जागृति स्कूल परिसर में आयोजित शिविर के अंतिम दिन कौशिकी दिवस के रूप में कार्यक्रम हुआ. इस दौरान साधकों ने सामूहिक रूप से कौशिकी नृत्य का अभ्यास किया. कार्यक्रम में कोलकाता से पहुंचे वरिष्ठ सन्यासी आचार्य वित्तमोहानंद अवधूत समेत आनंदमार्ग के साधु-संतों ने साधकों का मार्गदर्शन किया.
साधकों को कराया गया कौशिकी नृत्य का अभ्यास
कार्यक्रम के दौरान आचार्य प्रियकृष्णानंद अवधूत, आचार्य चिरंजयानंद अवधूत, अवधूतिका आनंद सत्यनिष्ठा आचार्य एवं अवधूतिका आनंद नितव्रता आचार्य ने कौशिकी नृत्य की प्रस्तुति दी. इसके बाद साधकों ने उनके मार्गदर्शन में सामूहिक रूप से कौशिकी नृत्य का अभ्यास किया.
शारीरिक और मानसिक अभ्यास के रूप में अपनाया जाता है कौशिकी नृत्य
आनंदमार्ग से जुड़े साधकों ने बताया कि कौशिकी नृत्य सामान्य नृत्य की विधा नहीं है, बल्कि इसे शारीरिक और मानसिक अभ्यास के रूप में अपनाया जाता है. नियमित अभ्यास में शरीर को विभिन्न दिशाओं में लयबद्ध तरीके से संचालित किया जाता है. इससे शरीर और मन के बीच संतुलन बनाने में सहायता मिलने की बात कही गयी.
6 सितंबर 1978 को पटना में दी गयी थी कौशिकी नृत्य की प्रक्रिया
आचार्य प्रियकृष्णानंद अवधूत ने बताया कि श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने 6 सितंबर 1978 को पटना में कौशिकी नृत्य की प्रक्रिया प्रदान की थी. आनंदमार्ग के अनुसार इसके नियमित अभ्यास से शरीर में लचीलापन, मेरुदंड की सक्रियता और मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में सहायता मिलती है. उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य के संदर्भ में भी कौशिकी नृत्य के अभ्यास की उपयोगिता बतायी.
साधना और अनुशासन पर भी हुई चर्चा
तीन दिवसीय शिविर के दौरान साधना, अनुशासन और आध्यात्मिक अभ्यास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई. साधकों को नियमित साधना और अनुशासित जीवनशैली के महत्व की जानकारी दी गयी. अंतिम दिन सामूहिक कौशिकी नृत्य के अभ्यास के साथ शिविर का विधिवत समापन किया गया.
आनंदमार्गियों ने आयोजन को सफल बनाने में दिया योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में आनंदमार्ग प्रचारक संघ किशनगंज के जिला प्रधान सुमन भारती, विद्यानाथ यादव, नीरज कुमार, प्रकाश मंडल, राजीव रंजन, कृष्ण कुमार सिंह, अजय कुमार सिंह, राजेश कुमार सिंह, नीलेश भारती, आमोद साह, पुष्पा कुमारी, मंगला देवी, सरस्वती देवी, दीपिका कुमारी सहित अन्य आनंदमार्गियों का योगदान रहा.
