ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Galgalia Factory: बिहार के मक्का उत्पादन के हब माने जाने वाले सीमांचल क्षेत्र, विशेषकर किशनगंज के ठाकुरगंज में मक्के के बाजार ने लंबी छलांग लगाई है. गलगलिया स्थित प्रमुख मक्का प्रसंस्करण इकाई ‘रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड’ द्वारा १३ जून के लिए जारी की गई नई खरीद दरों ने बाजार को एकाएक गरमा दिया है. महज तीन दिन पहले तक जो मक्का औसतन ₹18.70 प्रति किलोग्राम के स्तर पर बना हुआ था, उसकी कीमत अब बढ़कर ₹19.50 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. इस अचानक आई तेजी से पूरे क्षेत्र के अनाज व्यापारिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और आगामी दिनों में बाजार के और ऊंचे जाने के कयास लगाए जा रहे हैं.
गलगलिया मक्का फैक्ट्री ने तय किए ₹19.50 के नए रेट; मांग में भारी मजबूती
स्थानीय व्यापारिक सूत्रों और मंडी विश्लेषकों के अनुसार, मक्के की कीमतों में आए इस उछाल की मुख्य कड़ियां इस प्रकार जुड़ी हैं:
- प्रति क्विंटल ₹80 की बढ़त: प्रति किलो के भाव में हुई 80 पैसे की यह बढ़ोतरी थोक बाजार के लिहाज से ₹80 प्रति क्विंटल की बड़ी तेजी में तब्दील हो चुकी है.
- बढ़ती औद्योगिक मांग: स्टार्च, एथेनॉल और पोल्ट्री फीड (कुक्कुट आहार) निर्माताओं की ओर से मक्के की लगातार बढ़ती मांग के कारण रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड सहित अन्य बड़ी कंपनियों को अपनी खरीद दरें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है.
- बाहरी बाजारों का इनपुट: पूर्वोत्तर राज्यों (नॉर्थ-ईस्ट) और पश्चिम बंगाल की सिलीगुड़ी व जलपाईगुड़ी मंडियों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों ने भी स्थानीय स्तर पर मक्के की कीमतों को मजबूत संबल दिया है.
मुनाफे की उम्मीद में बड़े किसानों ने रोका स्टॉक; बाजार की चाल पर नजर
थमी बिकवाली: “दामों में लगातार हो रहे सुधार को देखते हुए ठाकुरगंज, पोठिया और गलगलिया क्षेत्र के बड़े प्रगतिशील किसानों और आढ़तियों ने फिलहाल मंडियों में माल गिराना कम कर दिया है. वे बेहतर मुनाफे के इंतजार में बाजार की चाल को भांप रहे हैं.”
बाजार के जानकारों का कहना है कि क्षेत्र के गोदामों में इस समय मक्के का एक बड़ा स्टॉक मौजूद है. चूंकि किसान और बड़े कारोबारी अभी बिक्री करने के मूड में नहीं हैं, इसलिए बाजार में माल की आवक पर थोड़ा दबाव बना है. यदि आपूर्ति (सप्लाई) की यह कमी और मांग का दबाव इसी तरह बरकरार रहा, तो जून के उत्तरार्ध तक मक्के की कीमतें एक नया रिकॉर्ड बना सकती हैं।
किसानों में उत्साह, कृषि आधारित उद्योगों की बढ़ी सरगर्मी
मक्के के इस शानदार वेदर साइकिल और मुनाफे ने सीमांचल के कृषि उद्योग को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. धान और चायपत्ती के बाद मक्का इस क्षेत्र की सबसे मुख्य नकदी फसल (Cash Crop) बनती जा रही है. स्थानीय प्रगतिशील किसानों ने बताया कि सीधे गलगलिया फैक्ट्री द्वारा उचित मूल्य मिलने से उन्हें बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति मिली है. फिलहाल, समूचे सीमांचल के किसानों, आढ़तियों और कॉरपोरेट खरीदारों की निगाहें अब पूरी तरह इस बात पर टिकी हैं कि रीगल रिसोर्सेस की यह खरीद दर आने वाले हफ्तों में ₹20 प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर पाती है या नहीं.
