बारिश के बाद सर्दी-जुकाम और बुखार का अटैक! प्लेट में सजाएं ये चीजें, बीमारियां रहेंगी कोसों दूर; जानें एक्सपर्ट डॉक्टर के टिप्स

बारिश के बाद बढ़ रहे हैं मौसमी बीमारियों का खतरा। सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार जैसी समस्याओं से कैसे बचें? जानिए डॉक्टर की सलाह और पौष्टिक आहार के नुस्खे।

किशनगंज. जिले में मानसून एक बार फिर सक्रिय रहने के कारण रुक-रुककर बारिश हो रही है. बारिश के बाद जगह-जगह जलजमाव और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. दिन में उमस और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार, फ्लू और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं. बदलते मौसम को हल्के में लेने के बजाय लोगों को स्वास्थ्य के प्रति विशेष सतर्क रहने की जरूरत है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.

तापमान में बदलाव से बढ़ता है संक्रमण का खतरा

जिले के चिकित्सक डॉ. शिव कुमार बताते हैं कि बरसात का मौसम कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है. इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस के पनपने की संभावना बढ़ जाती है. अचानक मौसम बदलने और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है. इससे सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और वायरल संक्रमण की शिकायत बढ़ सकती है. उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान से पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी रहता है. इसलिए सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और बासी भोजन से बचना चाहिए. ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर है.

पौष्टिक आहार से मजबूत करें रोग प्रतिरोधक क्षमता

डॉ. शिव कुमार ने बताया कि बदलते मौसम में शरीर की इम्युनिटी मजबूत रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार जरूरी है. भोजन में हरी सब्जियां, दाल, साग, पपीता, कद्दू, गाजर, टमाटर, पालक और अमरूद जैसे फल-सब्जियों को शामिल करना चाहिए.

अंकुरित अनाज प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं. आंवला, संतरा और नींबू जैसे विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ भी नियमित आहार में शामिल किए जा सकते हैं. पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीना भी जरूरी है.

धूल और प्रदूषण से सांस की नली पर असर

बारिश के बीच धूल और प्रदूषण भी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है. वातावरण में मौजूद धूल के सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर गले में खराश, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. ऐसे में धूल और प्रदूषण वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए.

बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ने पर विशेष सावधानी बरतते हुए समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.

बिना सलाह दवा लेने से बचें

बदलते मौसम में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचना चाहिए. विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी या कमजोरी जैसे लक्षण होने पर चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है.

जलजमाव और गंदगी से भी करें बचाव

घर और आसपास साफ-सफाई रखने तथा जलजमाव नहीं होने देने से कई बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है. मच्छरों से बचाव के लिए पानी जमा होने वाले स्थानों की नियमित सफाई और आवश्यक सावधानियां बरतना जरूरी है. बारिश के मौसम में स्वच्छ पानी, सुरक्षित खानपान, साफ-सफाई और संतुलित आहार पर ध्यान देकर मौसमी संक्रमण से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है.

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By Prabhat khabar news desk

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