पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट
BUIDCO Construction: किशनगंज जिला अंतर्गत पौआखाली बाजार क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली मुख्य सड़क इन दिनों महाजाम के टापू में तब्दील हो गई है. स्थानीय बाजार और उससे गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रतिदिन लगने वाले अप्रत्याशित जाम के कारण आम राहगीरों, स्कूली बच्चों, स्थानीय व्यापारियों और लंबी दूरी के वाहन चालकों को नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, पौआखाली थाना पुलिस के जवान सुबह से शाम तक लाठियां चमकाकर और धूप में खड़े रहकर यातायात सुचारू करने की पुरजोर कोशिश (मशक्कत) कर रहे हैं, लेकिन जब तक बुनियादी ढांचे में बदलाव नहीं होता, तब तक पुलिस की यह कवायद भी नाकाफी साबित हो रही है.
NH-327E पर बढ़ा भारी वाहनों का दबाव; अतिक्रमण मुक्त न होना बनी मुख्य वजह
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और परिवहन विंग के विशेषज्ञों के अनुसार, पौआखाली बाजार में जाम के इस विकराल रूप लेने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कड़ियां जिम्मेदार हैं:
- सड़क पर अत्यधिक लोड: राष्ट्रीय राजमार्ग-327ई के एलआरपी (LRP) चौक से पौआखाली बाजार होते हुए जिला मुख्यालय किशनगंज को जोड़ने वाली यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है. हाल के दिनों में इस रूट पर भारी मालवाहक ट्रकों, डंपरों और स्थानीय ई-रिक्शा (टोटो) के परिचालन में बेतहाशा वृद्धि हुई है.
- चौड़ीकरण और दोहरीकरण में देरी: इस व्यस्ततम सड़क का अब तक फोर-लेन या टू-लेन के मानकों के अनुरूप दोहरीकरण (Double Lane) नहीं हो सका है.
- अवैध अतिक्रमण का साया: सड़क के दोनों किनारों पर दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध निर्माण, फुटपाथों पर सजी दुकानों और अनधिकृत पार्किंग के कारण मुख्य सड़क की चौड़ाई आधी रह गई है, जिससे दो बड़े वाहनों के आमने-सामने आने पर पहिए पूरी तरह थम जाते हैं.
बुडको के नाला निर्माण ने कोढ़ में खाज का किया काम; एम्बुलेंस भी फंस रहीं
गंभीर आपातकालीन संकट: बाजार क्षेत्र की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि जीवन-मरण से जूझ रहे मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस और स्वयं कानून व्यवस्था बहाल करने वाली पुलिस की गाड़ियां भी इस जाम चक्रव्यूह में असहाय खड़ी नजर आती हैं.
वर्तमान समय में इस जाम को और अधिक हिंसक बनाने का काम बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बुडको) के सौजन्य से चल रहे नाला निर्माण कार्य ने किया है. बाजार के बीचो-बीच चल रही नाले की गहरी खुदाई, जगह-जगह खड़ी जेसीबी (JCB) मशीनें और सड़क पर ही डंप कर दी गई गिट्टी, बालू व छड़ जैसी निर्माण सामग्रियों ने बचे-खुचे रास्ते को भी पूरी तरह संकरा (ब्लॉक) कर दिया है. निर्माण एजेंसी द्वारा यातायात मोड़ने के लिए कोई वैकल्पिक संकेतक या बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं की गई है.
स्थानीय व्यवसायियों ने की बाईपास और नो-एंट्री की मांग; आंदोलन की चेतावनी
पौआखाली बाजार के आढ़तियों, फुटकर विक्रेताओं और आम नागरिकों ने जिला प्रशासन व अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) से गुहार लगाई है कि जब तक बुडको का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता और एनएच का चौड़ीकरण नहीं होता, तब तक बाजार क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश के लिए पीक ऑवर्स (व्यस्ततम समय) में ‘नो-एंट्री’ लागू की जाए.
इसके अलावा, लंबे समय से लंबित पड़ी बाईपास सड़क के निर्माण को भी धरातल पर उतारने की मांग तेज हो गई है. स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेकर अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू नहीं किया और बुडको को निर्माण सामग्री सड़क से हटाने का अल्टीमेटम नहीं दिया, तो वे मस्तान चौक और पौआखाली बाजार को पूरी तरह बंद कर चक्का जाम आंदोलन करने को विवश होंगे.
