ठाकुरगंज प्रखंड की तातपौवा पंचायत में करोड़ों रुपये की लागत से बना पंचायत सरकार भवन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. पंचायत स्तर पर ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे तमाम प्रशासनिक सेवाएं देने के उद्देश्य से निर्मित यह भवन इन दिनों देखरेख के अभाव में अपने मूल मकसद से भटक गया है. वर्तमान में यह सरकारी परिसर ग्रामीणों के लिए 'धोबी घाट' बन चुका है, जहां खुलेआम कपड़े, जलावन और घरेलू सामान सुखाए जा रहे हैं.
नदी किनारे बना भवन, ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी
तातपौवा पंचायत के वार्ड संख्या 11 और 12 की सीमा पर स्थित दुराघाटी गांव के समीप मेची नदी के किनारे यह पंचायत सरकार भवन बनाया गया है.
पूर्व मुखिया प्रतिनिधि विनय कुमार साह ने बताया कि भवन का निर्माण पंचायत के बिल्कुल अंतिम छोर पर कर दिया गया है. इसके कारण भेलागुड़ी और कादोगांव समेत कई गांवों के लोगों के लिए अपने ही पंचायत सरकार भवन पहुंचने से ज्यादा आसान ठाकुरगंज प्रखंड मुख्यालय जाना हो गया है.
बुनियादी सुविधाओं का अकाल और उड़ती धज्जियां
भवन परिसर की तस्वीरें साफ बयां करती हैं कि सरकारी संपत्ति के संरक्षण और प्रशासनिक निगरानी का यहाँ पूरी तरह अभाव है:
- सुविधाओं की कमी: परिसर में पेयजल जैसी अति आवश्यक बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है.
- गरिमा पर चोट: नियमित रोक-टोक न होने के कारण लोग परिसर में खुलेआम कपड़े और लकड़ियां सुखा रहे हैं, जिससे सरकारी संपत्ति की गरिमा प्रभावित हो रही है.
प्रतिनिधियों और पंचायत सचिव की जिम्मेदारी पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने इस स्थिति के लिए पंचायत के मुखिया, संबंधित वार्ड सदस्यों और पंचायत सचिव को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति की नियमित देखरेख और वहां प्रशासनिक माहौल बनाए रखना स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी है.
इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए जब संबंधित पंचायत सचिव से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो बार-बार कॉल करने के बाद भी उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
