सीमांचल के सीमावर्ती जिले किशनगंज में सोमवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है. जिले के सभी सात प्रखंडों में सुबह से ही आसमान में घने काले बादलों का जमावड़ा बना हुआ है. मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, दिनभर जिले के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश और तेज बौछारें पड़ने के प्रबल आसार हैं. बारिश की संभावना 50 से 80 प्रतिशत तक आंकी गई है, जिससे अधिकतम तापमान गिरकर 31 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है.
सदर में सुबह से झमाझम, बहादुरगंज व दिघलबैंक में गरज-चमक का अंदेशा
किशनगंज सदर प्रखंड और शहरी इलाकों में सुबह से ही फुहारों और हल्की से मध्यम बारिश का दौर शुरू हो गया है, जिससे सड़कों पर मौसम सुहाना नजर आ रहा है. वहीं बहादुरगंज प्रखंड में गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना बनी हुई है. भारत-नेपाल सीमा से सटे दिघलबैंक प्रखंड में भी घने बादल छाए हुए हैं और दोपहर तक झमाझम बारिश के आसार जताए गए हैं.
कोचाधामन, पोठिया और ठाकुरगंज में भी फुहारें, सुहाना हुआ मौसम
जिले के कोचाधामन और पोठिया प्रखंडों में ठंडी हवाओं के साथ बीच-बीच में तेज बौछारें पड़ने से मौसम बेहद खुशनुमा हो गया है. उधर टेढ़ागाछ प्रखंड में मेघ गर्जन के साथ तेज आंधी-पानी की स्थिति बनने की संभावना है. चाय बगान बहुल ठाकुरगंज प्रखंड में भी आसमान में काले घने बादलों की आवाजाही लगातार बनी हुई है, जहां शाम तक रुक-रुक कर बारिश होने का अनुमान है.
उमस भरी तपिश से मिली निजात, पारे में आई गिरावट
बीते कुछ दिनों से लगातार पड़ रही चिपचिपी गर्मी और उमस से हलकान जिलेवासियों को इस मानसूनी बारिश से बड़ी राहत मिली है. तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दिन के समय वातावरण में ठंडक घुल गई है. बारिश का यह दौर धान की रोपाई कर चुके किसानों के लिए भी वरदान साबित हो रहा है.
ठनका गिरने की आशंका, खुले मैदान और पेड़ों से दूर रहने की हिदायत
मौसम विभाग और जिला आपदा प्रबंधन शाखा ने बारिश के दौरान तेज मेघगर्जन और वज्रपात (ठनका) की गंभीर आशंका को देखते हुए नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है. विशेषकर ग्रामीण व दियारा क्षेत्रों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को आगाह किया गया है कि बारिश या बिजली चमकने के दौरान वे किसी भी हाल में खुले मैदान, बिजली के खंभों या ऊंचे पेड़ों के नीचे शरण न लें, बल्कि तुरंत किसी पक्के मकान में चले जाएं.
