ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Garib Nawaz Express: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर पिछले 72 घंटों (3 दिनों) के भीतर जो विहंगम नजारा देखने को मिला, उसने रेल प्रशासन के उस तार्किक दावों की पोल खोल दी है जिसके तहत इस रूट पर पैसेंजर लोड कम आंका जाता था. रेलवे के तकनीकी ब्लॉक के कारण मार्ग परिवर्तित कर चलाई गई ट्रेन संख्या 15715/16 किशनगंज–अजमेर गरीब नवाज एक्सप्रेस जैसे ही ठाकुरगंज के प्लेटफॉर्म पर रुकी, पूरा स्टेशन परिसर यात्रियों और उनके सामानों से खचाखच भर गया. इस अस्थायी ठहराव ने न केवल रेल यात्रियों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि 13 वर्ष पुरानी उस ठंडे बस्ते में पड़ी योजना की यादें भी ताजा कर दीं, जिसे वर्ष 2013 में ही रेल मंत्रालय की हरी झंडी मिल चुकी थी, लेकिन वह कभी कागजों से बाहर नहीं आ सकी.
ठाकुरगंज से सिलीगुड़ी तक के यात्रियों का रेला; डायवर्जन बना वास्तविक मांग का पैमाना
3 दिनों के इस अस्थायी रूट डायवर्जन के दौरान जमीनी हकीकत की कुछ मुख्य कड़ियां इस प्रकार उभर कर सामने आईं:
- यात्रियों का भौगोलिक नेटवर्क: ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों में केवल ठाकुरगंज ही नहीं, बल्कि पड़ोसी कस्बों जैसे पौआखाली, गलगलिया, बहादुरगंज के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के बागडोगरा, पानीटंकी और सिलीगुड़ी शहर के सैकड़ों दैनिक व लंबी दूरी के यात्री शामिल थे.
- सीधी कनेक्टिविटी की मांग: यात्रियों का साफ कहना था कि यदि यह ट्रेन इस रूट (ठाकुरगंज-गलगलिया-अलुआबारी) होकर नियमित चले, तो सीमांचल और उत्तर बंगाल की लाखों की आबादी को लखनऊ, दिल्ली, जयपुर और अजमेर जैसे औद्योगिक व धार्मिक केंद्रों के लिए बार-बार ट्रेनें बदलने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी.
1819 किमी का लंबा सफर: 17 वर्ष पहले लालू प्रसाद ने दी थी सीमांचल को यह जीवनरेखा
गरीब नवाज एक्सप्रेस के परिचालन इतिहास की कड़ियां सीमांचल के स्वर्णिम रेल युग से जुड़ी हैं:
- ऐतिहासिक शुरुआत: आज से ठीक 17 वर्ष पहले 4 जून 2008 को तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और तत्कालीन कद्दावर सांसद तस्लीमुद्दीन ने किशनगंज स्टेशन पर संयुक्त रूप से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी.
- विशाल रूट नेटवर्क: यह ट्रेन कुल 1819 किलोमीटर की लंबी दूरी महज 39 घंटे 25 मिनट में पूरी करती है. यह बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान समेत देश के 6 राज्यों को आपस में जोड़ती है, जो इस इलाके के प्रवासी मजदूरों, जूट-चायपत्ती व्यापारियों और छात्रों के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है.
2013 में टाइम-टेबल में भी छप गया था नाम; फिर फाइलों में कैसे कैद हो गया विस्तार?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ठाकुरगंज रेल यात्री समिति के पदाधिकारियों ने किया है:
प्रशासनिक दस्तावेज का इनपुट: “ठाकुरगंज रेल यात्री समिति के सचिव अमित सिन्हा एवं उपाध्यक्ष अरुण सिंह ने बताया कि वर्ष 2013 में ही रेलवे बोर्ड ने जनभावनाओं का आदर करते हुए गरीब नवाज एक्सप्रेस को ठाकुरगंज में कमर्शियल स्टॉपेज देते हुए सिलीगुड़ी जंक्शन तक विस्तारित (Extend) करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया था.”
यहां तक कि उस वर्ष की नई रेलवे समय सारणी (Railway Time-Table) में भी इस ट्रेन के सिलीगुड़ी आगमन और प्रस्थान का समय दर्ज कर दिया गया था. लेकिन इसके बाद अचानक रेल भवन, नई दिल्ली के गलियारों में ऐसी कौन सी फाइलें दबीं कि सरकारों और रेल मंत्रियों के बदलने के बाद भी यह विस्तार हकीकत नहीं बन सका.
जब रास्ता साफ है और पैसेंजर भी तैयार, तो रेलवे को किस बाधा का है इंतजार?
3 दिनों के इस अस्थायी प्रयोग ने रेलवे बोर्ड के सामने एक अकाट्य साक्ष्य (Proof of Demand) पेश कर दिया है कि ट्रेन खाली नहीं चलेगी. स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने रेल मंडल प्रबंधक (DRM) और उत्तर पूर्वी सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक से मांग की है कि इस डायवर्जन के टिकट बिक्री के डेटा और पैसेंजर काउंट का मूल्यांकन किया जाए.
जब ट्रैक भी उपलब्ध है, इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार है और बोर्ड की पुरानी प्रशासनिक मंजूरी भी फाइलों में मौजूद है, तो आखिर सीमांचल के हक पर यह कुंडली क्यों मारी गई है? ठाकुरगंज के प्लेटफॉर्म पर उमड़ी यह भीड़ अब सीधे तौर पर रेल मंत्रालय से पूछ रही है कि गरीब नवाज एक्सप्रेस को उसके अंतिम गंतव्य सिलीगुड़ी जंक्शन तक पहुंचाने का पहिया आखिर कब घूमेगा?
