ई-शिक्षाकोष पोर्टल के दौर में भी छुट्टी के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर शिक्षक, कागजी व्यवस्था पर उठे सवाल

ई-शिक्षाकोष पोर्टल के बावजूद किशनगंज जिले के शिक्षकों को अभी भी अवकाश स्वीकृति के लिए प्रखंड और जिला शिक्षा कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. यह स्थिति न केवल शिक्षकों के समय और धन की बर्बादी कर रही है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है.

बिहार सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 'ई-शिक्षाकोष' (E-Shikshakosh) पोर्टल लागू किया है. वर्तमान में शिक्षकों की बायोमेट्रिक हाजिरी, प्रशिक्षण की जानकारी, स्थानांतरण, एमडीएम (MDM) के लाभान्वित बच्चों की संख्या और नामांकन प्रतिवेदन जैसे तमाम प्रशासनिक कार्य इसी पोर्टल से संचालित हो रहे हैं. हालांकि, किशनगंज जिले में शिक्षकों को अवकाश स्वीकृति (Leave Approval) के लिए आज भी प्रखंड और जिला शिक्षा कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे शिक्षकों के समय, धन और बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है.

सरकारी आदेश बनाम जमीनी हकीकत

शिक्षा विभाग के उप सचिव द्वारा 2 जून 2025 को जारी ज्ञापांक-1444 में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि:

  • डिजिटल आवेदन अनिवार्य: शिक्षक एवं शिक्षिकाएं अपने सभी प्रकार के अवकाश आवेदन स्वयं ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड करेंगे.
  • भौतिक आवेदन पर रोक: किसी भी परिस्थिति में कागजी (भौतिक) आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा.

इसके बावजूद किशनगंज जिले में आकस्मिक एवं विशेष आकस्मिक अवकाश को छोड़कर अन्य छुट्टियों के लिए शिक्षकों से कागजी आवेदन जमा कराए जा रहे हैं.

'सहयोग पोर्टल' पर दर्ज हुई शिकायत और DEO का जवाब

दफ्तरों की भागदौड़ से तंग आकर एक शिक्षक ने बिहार सरकार के 'सहयोग पोर्टल' पर विभागीय आदेश का पालन न होने की शिकायत दर्ज कराई.

जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) किशनगंज का पक्ष: शिकायत के निस्तारण के दौरान DEO किशनगंज ने 31 जुलाई 2026 को जारी अपने पत्र में विभागीय ज्ञापांक-1444 का हवाला देते हुए उत्तर दिया कि अवकाश आवेदन ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर ही अपलोड किए जाएंगे और विभागीय निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी.

शिक्षकों की मुख्य समस्याएं और बड़े सवाल

विभाग का जवाब और उसका आदेश डिजिटल व्यवस्था की वकालत करता है, लेकिन धरातल पर क्रियान्वयन न होने से शिक्षकों में भारी असंतोष है:

  1. पढ़ाई का नुकसान: साधारण छुट्टी स्वीकृत कराने के लिए शिक्षकों को विद्यालय छोड़कर बीईओ और डीईओ कार्यालय जाना पड़ता है.
  2. आर्थिक व मानसिक प्रताड़ना: बार-बार चक्कर लगाने से शिक्षकों पर अनावश्यक वित्तीय और मानसिक दबाव पड़ता है.
  3. प्रशासनिक विरोधाभास: जब हाजिरी, ट्रांसफर और एमडीएम का डेटा ऑनलाइन लिया जा सकता है, तो अवकाश प्रबंधन को पोर्टल से प्रभावी तरीके से क्यों नहीं जोड़ा जा रहा?

सहयोग पोर्टल पर पहुंची यह शिकायत अब केवल एक व्यक्ति की समस्या न रहकर पूरी शिक्षा व्यवस्था के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल बन गई है. अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस आदेश को धरातल पर कब तक सख्ती से लागू करा पाता है.


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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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