किशनगंज सदर अस्पताल में फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल से आपदा प्रबंधन का अभ्यास

राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार एवं स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार 4 से 10 मई तक मनाए जा रहे फायर सेफ्टी वीक के अंतर्गत गुरुवार को सदर अस्पताल परिसर में व्यापक फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया.

आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण

सेफ हॉस्पिटल, सेफ सोसाइटी के संकल्प के साथ अधिकारियों व कर्मियों ने ली अग्नि सुरक्षा शपथ

फायर सेफ्टी वीक के तहत सदर अस्पताल से लेकर सीएचसी-पीएचसी तक सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष फोकस

किशनगंज गर्मी के मौसम में आग लगने की बढ़ती घटनाओं और अस्पतालों जैसे संवेदनशील संस्थानों में आपदा जोखिम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिलेभर में फायर सेफ्टी को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार एवं स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार 4 से 10 मई तक मनाए जा रहे फायर सेफ्टी वीक के अंतर्गत गुरुवार को सदर अस्पताल परिसर में व्यापक फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. इस दौरान अस्पताल परिसर में आग लगने की काल्पनिक स्थिति तैयार कर स्वास्थ्यकर्मियों को आपातकालीन प्रतिक्रिया, मरीजों की सुरक्षित निकासी, रेस्क्यू तकनीक एवं आग बुझाने के प्राथमिक उपायों का प्रशिक्षण दिया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों को फायर रेजिलिएंट बनाते हुए किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करना रहा.

आपदा के समय घबराहट नहीं, प्रशिक्षित प्रतिक्रिया जरूरी : डॉ राज कुमार चौधरी

कार्यक्रम में उपस्थित सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि आईसीयू, ओटी, एचडीयू एवं नवजात वार्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है. उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को इस प्रकार प्रशिक्षित करना है ताकि किसी भी आपात स्थिति में बिना घबराए व्यवस्थित तरीके से मरीजों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. उन्होंने सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित रूप से फायर सेफ्टी अभ्यास आयोजित करने पर जोर दिया.

अस्पतालों को सुरक्षित और आपदा के प्रति तैयार बनाना प्राथमिकता : डॉ उर्मिला कुमारी

गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ उर्मिला कुमारी ने कहा कि फायर सेफ्टी वीक स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने कहा कि अस्पतालों में कार्यरत प्रत्येक कर्मी को फायर अलार्म, अग्निशमन यंत्र एवं आपदा प्रबंधन प्रक्रिया की जानकारी होना आवश्यक है. उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों में डूज़ एंड डोंट्स का प्रदर्शन, सुरक्षा चेकलिस्ट का अनुपालन एवं नियमित मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि अस्पतालों को अधिक सुरक्षित एवं आपदा के प्रति तैयार बनाया जा सके.

रेस्क्यू, अलार्म और सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया का किया गया प्रदर्शन

मॉक ड्रिल के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को रेस्क्यू, अलार्म एवं कांफिन की विस्तृत जानकारी दी गई. आग लगने की स्थिति में मरीजों, विशेषकर गंभीर एवं असहाय मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम में उपाधीक्षक डॉ अनवर हुसैन, डीपीएम डॉ मुनाजिम सहित जिला स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे. सभी अधिकारियों एवं कर्मियों ने सुरक्षित अस्पताल-सुरक्षित समाज के संकल्प के साथ अग्नि सुरक्षा शपथ ग्रहण की तथा अस्पताल परिसर में सुरक्षा मानकों के पालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

सीएचसी एवं पीएचसी स्तर तक चलाया जा रहा जागरूकता अभियान

फायर सेफ्टी वीक के तहत जिले के सभी सीएचसी एवं पीएचसी में भी मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण, जागरूकता गतिविधियां, पोस्टर प्रदर्शन एवं ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल आग से बचाव तक सीमित नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों को ऐसी व्यवस्था से लैस करना है जहां किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित, सुरक्षित और व्यवस्थित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके.

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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