किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड शिक्षा कार्यालय (BEO Office) में सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगाए गए CCTV कैमरों की वर्तमान स्थिति अब बड़े प्रशासनिक सवाल खड़े कर रही है. कार्यालय परिसर में लगे कैमरों का एंगल असामान्य रूप से ऊपर छत की ओर मुड़ा हुआ है, जिससे नीचे फर्श और कमरों में होने वाली तमाम गतिविधियां पूरी तरह से कैमरे की निगरानी से बाहर हो गई हैं. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब कैमरे नीचे की गतिविधियों को दर्ज ही नहीं कर पा रहे हैं, तो आखिर यह निगरानी किसकी हो रही है?
सुरक्षा या महज सजावट?
CCTV कैमरे किसी कार्यालय में केवल सजावट की वस्तु नहीं होते, बल्कि उनका प्राथमिक उद्देश्य परिसर की दैनिक गतिविधियों पर नजर रखना, सरकारी अभिलेखों व महत्वपूर्ण फाइलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में साक्ष्य (Evidence) सुरक्षित रखना होता है:
- निगरानी से बाहर गतिविधियां: कैमरे का रुख ऊपर की ओर होने से टेबल, अलमारियों और फाइलों के पास होने वाली हलचल रिकॉर्डिंग से गायब हो रही है.
- मंशा पर सवाल: इस स्थिति ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था के दावों की हवा निकाल दी है, बल्कि इसके पीछे की मंशा पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं.
लापरवाही या सोची-समझी साजिश?
कार्यालय में शिक्षा विभाग और शिक्षकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभिलेख, वित्तीय दस्तावेज और गोपनीय फाइलें रखी होती हैं. ऐसे में कैमरों की इस स्थिति को लेकर कई आशंकाएं जताई जा रही हैं:
- क्या जानबूझकर बदला गया एंगल? सवाल उठ रहा है कि क्या कार्यालय में होने वाली किसी खास गतिविधि या लेन-देन को कैमरे की नजर से छुपाने के लिए जानबूझकर दिशा बदली गई है?
- जांच की मांग: यदि यह किसी तकनीकी खराबी या हवा के कारण हुआ है तो इसे तत्काल दुरुस्त क्यों नहीं किया गया? वहीं यदि किसी कर्मचारी या असामाजिक तत्व ने जानबूझकर ऐसा किया है, तो यह गंभीर जांच का विषय है.
वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप का इंतजार
स्थानीय लोगों और शिक्षकों की निगाहें अब शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं. मांग की जा रही है कि:
- फुटेज की जांच हो: अधिकारी मौके पर पहुंचकर कैमरों की भौतिक स्थिति का मुआयना करें और DVR रिकॉर्डिंग की जांच कर यह पता लगाएं कि कैमरों का एंगल कब और किस परिस्थिति में बदला गया.
- जवाबदेही तय की जाए: जिस अवधि में कैमरे ऊपर की ओर थे, उस दौरान रिकॉर्ड रूम अथवा कार्यालय में कौन-कौन मौजूद था, इसकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.
फिलहाल, कैमरों की यह असामान्य स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है और अब यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह महज देखरेख का अभाव है या किसी गड़बड़ी को छुपाने का प्रयास.
