जनसेवा के उद्देश्य से स्थापित की गई जनोपयोगी सुविधाएं जब प्रशासनिक और सामाजिक उपेक्षा की शिकार हो जाती हैं, तो वे अपने मूल अस्तित्व पर ही सवाल खड़े करने लगती हैं. ऐसा ही एक चिंताजनक नजारा किशनगंज के रजिस्ट्री ऑफिस परिसर में देखने को मिल रहा है. यहां मारवाड़ी युवा मंच द्वारा करीब 16 वर्ष पूर्व स्थापित कराया गया 'अमृतधारा' शीतल पेयजल केंद्र आज पूरी तरह बदहाल और जर्जर स्थिति में पड़ा हुआ है. जहां कभी आम लोगों को शीतल और स्वच्छ पेयजल मिलता था, वहां आज गंदगी और बंद पड़े नलों का अंबार है.
प्रतिदिन पहुंचते हैं सैकड़ों लोग, पानी की एक-एक बूंद को मोहताज
रजिस्ट्री ऑफिस परिसर में प्रतिदिन जमीन की रजिस्ट्री, दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य सरकारी कार्यों के लिए जिले भर से सैकड़ों की संख्या में आम लोग पहुंचते हैं:
- अधिवक्ताओं और आगंतुकों को दिक्कत: आम नागरिकों के अलावा बड़ी संख्या में अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक (कातिब) और विभागीय कर्मचारी भी यहां दिनभर कार्यरत रहते हैं.
- गर्मी में बढ़ी परेशानी: भीषण गर्मी और उमस के बीच परिसर में पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
वर्ष 2010 में तत्कालीन डीएम ने किया था उद्घाटन
पेजल केंद्र पर लगे शिलापट्ट (उद्घाटन पट्टिका) के अनुसार, मारवाड़ी युवा मंच किशनगंज द्वारा निर्मित इस 'अमृतधारा' पेयजल केंद्र का उद्घाटन 21 अगस्त 2010 को तत्कालीन जिला पदाधिकारी (DM) संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी ने किया था. इस अवसर पर तत्कालीन उप विकास आयुक्त (DDC) राज कृष्ण झा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे. उस समय इस सामाजिक पहल की व्यापक सराहना हुई थी, लेकिन देखरेख के अभाव में अब यह महज एक शिलापट्ट बनकर रह गया है.
सीलन, गंदगी और जर्जर पाइपों का अंबार
वर्तमान में इस जनोपयोगी परियोजना की स्थिति बेहद दयनीय है:
वर्तमान स्थिति: "पेजल केंद्र के चारों ओर गंदगी का साम्राज्य है, दीवारों पर पपड़ी और सीलन जम चुकी है, पाइप तथा नल टूटकर जर्जर हो चुके हैं और जल आपूर्ति पूरी तरह ठप है."
पुनः चालू कराने की उठी मांग
स्थानीय निवासियों, अधिवक्ताओं और रजिस्ट्री ऑफिस आने वाले लोगों का कहना है कि सार्वजनिक सुविधाओं का नियमित रखरखाव संस्था और स्थानीय प्रशासन दोनों का दायित्व है. आम नागरिकों ने मारवाड़ी युवा मंच और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस 'अमृतधारा' पेयजल केंद्र का अविलंब जीर्णोद्धार कराकर इसे पुनः चालू किया जाए, ताकि प्रतिदिन आने वाले सैकड़ों लोगों को पीने का स्वच्छ पानी मिल सके.
