मां मेरा क्या कुसूर, क्यों फेंक दिया मुझे खेत में...

कहां जा रहे हम. मक्के की खेत में मिली नवजात टप्पू हाट चौक के समीप बुधवार को सड़क किनारे मकई की खेत में एक नवजात शिशु मिला, चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने नवजात बच्ची को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भरती कराया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है. दिघलबैंक : दिघलबैंक प्रखंड में मां की […]

कहां जा रहे हम. मक्के की खेत में मिली नवजात

टप्पू हाट चौक के समीप बुधवार को सड़क किनारे मकई की खेत में एक नवजात शिशु मिला, चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने नवजात बच्ची को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भरती कराया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है.
दिघलबैंक : दिघलबैंक प्रखंड में मां की ममता एक बार शर्मसार होती नजर आयी. टप्पू हाट चौक के समीप बुधवार को सड़क किनारे मकई खेत में एक नवजात शिशु मिला. राहगीर सड़क होकर जा रहे थे कि उसी समय खेत में एक दूधमुहे बच्ची की सिसिकियां उनके कानों में पड़ी. बच्चे की आवाज सुन कर सड़क होकर जाने वाले राहगीर रूक कर इधर-उधर देखने लगे. उसके बाद स्थानीय लोगों का जमावड़ा लग गया.
इसकी सूचना दिघलबैंक पुलिस और चाइल्ड लाइन को दी गयी. इसके बाद चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने नवजात बच्ची को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भरती कराया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है.
बेटियों को आज भी समझा जाता है बोझ
दिघलबैंक. एक और जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ सहित कई योजनाएं चलाकर बेटियों को बचाने का हर संभव प्रयास कर रही है. वहीं आज भी हमारे समाज में बेटियों को दोयम दर्जे का इंसान ही समझा जाता है. तभी तो कुछ दिन पहले ही इस दुनिया में कदम रखने वाली एक नवजात को दिघलबैंक के टप्पू में शायद इस लिए सड़क किनारे मक्का खेत में लावारिस हालात में छोड़ दिया गया, क्यों कि वो बेटी थी. आखिर उसे जन्म देने वाले माता पिता ने ऐसा क्यों किया,वो तो बच्ची की किस्मत अच्छी थी की वो बच गयी.
अगर कुछ देर हो जाती तो शायद उसका बचना मुश्किल हो जाता. कहा जाता है की पुत कपूत हो सकता है लेकिन माता कभी कुमाता नहीं होती,लेकिन ऐसा हुआ है. क्या बेटियां आज भी मां बाप के लिए बोझ है या फिर कोई दूसरा मामला तो नहीं.क्योंकि कई तरह के कयास लगाये जा रहे है.दबी जुबान से कई लोगों ने बताया की हो सकता है कुंवारी माँ वाली कोई कहानी तो नहीं है जो लोक लज्जा या फिर समाज के भय के कारण बच्ची को जन्म देने वाली मां ने इतना बड़ा निर्णय ले लिया कि नौ माह तक अपने कोख में रखने और जन्म देने के बाद मरने के लिए वीराने में छोड़ दिया,कई प्रश्न है जो अभी भी मुँह बाये खड़ी है. आखिर यह बच्चा है किसका और उसकी क्यों ऐसी दुर्गति हो रही है.
जन्म देने से पहले ही मार देने की घटनाओं तथा जन्म के बाद बेटियों को फेंक देने की घटनाओं के बाद भी हम कहां से लाएंगे लता मंगेश्कर,कल्पना चावल,सुनीता विलियम्स,और न जाने कितनी विभूतियां जो बेटी होने के बावजूद भी किसी परिचय की मोहताज नहीं रही,और पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनायीं.
खेत में रहने के कारण बच्ची की हालत नाजुक
चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए नवजात को किशनगंज भेज दिया. डॉक्टरों ने बताया कि नवजात का जन्म तीन चार दिन पूर्व ही हुआ है. कई घंटे खेत में रहने के कारण नवजात बच्ची की हालात खराब हो गयी थी. वहीं इस घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. लोग तरह तरह के कयास लगा रहे हैं कि
यह बच्ची है कौन? और किस परिस्थिति में इसे इस हालात में छोड़ दिया गया. वहीं दिघलबैंक पुलिस उस माता पिता की तलाश में है जिसने बच्ची को लावारिस हालात में सड़क के किनारे छोड़ आया है. चाइल्ड लाइन की सदस्या दिप्ती कुमारी, पुश्व कुमारी तथा नन्द किशोर कर्मकार ने बताया की नवजात को किशनगंज से पूर्णिया नवजात गृह में रखने के लिये ले जाया जा रहा है.

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