नेपाल वापस लौटे गजराज
हाथियों के बार-बार के उपद्रव का जिला वासियों को सामना करना पड़ रहा है. एक बार फिर वन विभाग ने हाथियों के झुंड को बड़ी मशक्कत के बाद नेपाल वापस भेजा.
दिघलबैंक : नेपाल के जंगलों से भटक कर भारतीय सीमा में आये आधा दर्जन हाथियों के झुंड को स्थानीय पुलिस एवं वन विभाग ने स्थानीय लोगों की मदद से वापस भेजा. हालांकि इस जटिल काम में इन लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ी. गौरतलब है कि मंगलवार को आमडांगी ईंट भट्ठा के समीप दिन भर मकई खेत में हाथियों का झुंड मौजूद रहा और रात में दस बजे के बाद इन हाथियों ने अपना स्थान बदला.
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दिन के समय आबादी वाले इलाके से खुद को दूर रखना ही चाहते हैं जैसे ही रात को वातावरण में खामोशी होती है ये जंगली जानवर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करेगी.
मक्का के लोभ में आ रहे हाथी
इस समय इलाके में मक्के की फसल से खेत लहलहा रहे हैं. और यही मकई का स्वाद इन हाथियों को इन इलाकों में आने को मजबूर कर रहा है. मक्के की फसल के बीच खुद को सुरक्षित समझते हैं. बीते कुछ समय में जितनी बार भी इन हाथियों का आगमन इस इलाके में हुआ है मकई के खेत को ही टारगेट बनाया है. पहले मकई खाते हैं और फिर फसलों को रौंद देते हैं.
लोग दहशत में
पहले तेंदुआ फिर जंगली बिल्ली और अब हाथियों ने सीमावर्ती क्षेत्र के लोग को दहशत में डाल दिया है. बुधवार को भी बालुबाड़ी गांव में हाथी के आगमन की अफवाह फैली. सीमा से सटे गांव के लोग इन दिनों रात्रि को बाहर निकलने में असहज महसूस करते है. उन्हें ये डर सता रहा है कि ना जाने किधर से कौन सा जंगली जानवर निकल आये.
वन विभाग की टीम की नियुक्ति की मांग
बार-बार जानवरों के उत्पात के बाद अब स्थानीय लोग वन विभाग के एक स्थायी टीम की मांग कर रही है. ताकि वैसे हालात में तुरंत मौके पर वन विभाग की टीम मौजूद हो सके.
