पिता वायुसेना में वारंट ऑफिसर, तो पुत्र थल सेना का अफसर, जिले को अपनी माटी के लाल पर नाज
मिलिट्री अस्पताल रांची में आयोजित समारोह में मिला सम्मान, सैन्य परिवार की परंपरा को दी नयी ऊंचाई
परबत्ता. बिहार की मिट्टी ने एक बार फिर देश को एक जांबाज सैन्य अधिकारी दिया है. परबत्ता प्रखंड के सिराजपुर निवासी डॉ प्रियदर्शन कुमार ने भारतीय थल सेना में कैप्टन बनकर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है. डॉ प्रियदर्शन की इस उपलब्धि से सिराजपुर गांव सहित पूरे क्षेत्र में हर्ष और गर्व का माहौल है.
पारिवारिक विरासत को दी नयी ऊंचाई
डॉ प्रियदर्शन के पिता मुकेश चौधरी भारतीय वायुसेना में वारंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. बचपन से ही घर में देशभक्ति का माहौल देख रहे प्रियदर्शन ने चिकित्सा के क्षेत्र को चुनकर देश सेवा का संकल्प लिया. उनकी माता नीलम देवी ने अपने बेटे की इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए इसे उसकी कठिन मेहनत का फल बताया है.
शिक्षा व सफलता का सफर
डॉ प्रियदर्शन ने अपनी प्राथमिक और उच्च शिक्षा के बाद कर्नाटक से अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की. डॉक्टर बनने के बाद उन्होंने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की. इस सफलता के बाद उन्हें भारतीय थल सेना में कैप्टन के पद पर नियुक्त किया गया है.
भावुक कर देने वाला पल
मिलिट्री अस्पताल, रांची में आयोजित एक गरिमामय ””कमीशनिंग”” कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रियदर्शन को आधिकारिक रूप से कैप्टन का पद सौंपा गया. इस गौरवपूर्ण क्षण के दौरान उनके पिता वारंट ऑफिसर मुकेश चौधरी और माता नीलम देवी ने स्वयं अपने बेटे के कंधों पर सैन्य रैंक के सितारे लगाए. वर्दी पर चमकते इन सितारों और माता-पिता के चेहरे पर गर्व के आंसुओं ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया.
क्षेत्र में जश्न का माहौल
जैसे ही डॉ प्रियदर्शन के कैप्टन बनने की खबर सिराजपुर पहुंची, बधाई देने वालों का तांता लग गया. ग्रामीणों का कहना है कि प्रियदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृढ़ संकल्प हो, तो मेहनत के बल पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है. उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गयी है.
