समय पर नहीं पहुंचती पुलिस

अपराध. गोलीबारी की घटना से लोगों में दहशत मंगलवार की सुबह गोगरी प्रखंड के पसराहा थाना क्षेत्र के सर्किल नंबर एक के बसुआ दियारा में अपराधी सुगन यादव व शैलेन्द्र यादव के बीच हुई गोलीबारी से दियारा के लोग सहम गये हैं. हैरत की बात यह है कि सूचना मिलने पर भी संसाधन की कमी […]

अपराध. गोलीबारी की घटना से लोगों में दहशत

मंगलवार की सुबह गोगरी प्रखंड के पसराहा थाना क्षेत्र के सर्किल नंबर एक के बसुआ दियारा में अपराधी सुगन यादव व शैलेन्द्र यादव के बीच हुई गोलीबारी से दियारा के लोग सहम गये हैं. हैरत की बात यह है कि सूचना मिलने पर भी संसाधन की कमी के कारण पुलिस घटना स्थल पर समय पर नहीं पहुंच पाती है.
खगड़िया : मंगलवार को बसुआ दियारा में हुई गोलीबारी ने पुलिस महकमा में हलचल तेज कर दिया है. दियारा में दूर-दूर तक लहलहाती मकई की फसल के बीच घोड़े की टाप की आवाज सुनाई दे रही है. दियारा में काम करने वाले मजदूर व किसान घोड़ों पर बंदूक थामे अपराधियों की टोली को देख सहम जाते हैं.
यहां जल, जलकर व जमीन पर कब्जे को लेकर अपराधी गिरोहों की जुगलबंदी होती है तो यही अदावत का कारण भी बनती है.
घटना को भुना सकता है लाल आतंक:
इस घटना के बाद जानकारों का मानना है कि अभी जिस प्रकार का माहौल है ऐसे में दियारा के आतंक माने जाने वाले अन्य आतंकी फायदा उठा सकते हैं. अपना पुराना बदला लेने के लिए फिर से गिरोह को जुटाने और गैंगवार की जुगत में सक्रिय हो सकता है. चूंकि इस समय कोसी दियारा में लाल आतंक का सबसे बड़ा खतरा कुख्यात सहिंद्र यादव गिरोह शिथिल होना हो सकता है. चूंकि इस गिरोह की कमर तीन वर्ष पूर्व 11 अप्रैल 2012 को एसटीएफ के आॅपरेशन के बाद टूट गया है. जिससे शातिर सहिन्द्र को आत्मसमर्पन करने को मजबूर कर दिया था. ऐसे मौके का फायदा लाल आतंक उठा ले तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.
दियारा की गैर मजरुआ आम व खास जमीन :
इस दियारा की अधिकांश जमीन खगड़िया, बेगूसराय व सहरसा के लोगों की है. सबसे अधिक जमीन बेगूसराय जिले के रधुनाथपुर, खगड़िया जिले के नया टोल, अलौली, सैदपुर, बन्नी, मानसी आदि के लोगों की है. कुछ लोगों ने अपनी जमीन यहां के लोगों के हाथों बेच दिया तो कुछ ने सर्वे को कोर्ट में चुनौती दे रखी है. इसी प्रकार की जमीन पर यहां के महादलित अपना निवास बना कर रहने लगते हैं.
ऐसे में जमींदारों को लगता है की जमीन पर अगर ये लोग कब्जा कर लेंगे तो फिर केस फाइनल हो जाने के बाद भी जमीन खाली कराना संभव नहीं होगा. इसलिये पहले से ये लोग जमीन पर किसी को कब्जा करने देना नहीं चाहते है. जिसका परिणाम मंगलवार की घटना है.
संसाधनों की कमी से जुझती है पुलिस : संसाधन की कमी के कारण दियारा इलाके में पुलिस भी समय पर नहीं पहुंच पाती है. दियारा में गश्ती के लिए जिला पुलिस के पास न तो घुड़सवार दस्ता है और न ही पर्याप्त संख्या में पुलिस बल ही उपलब्ध है. पसराहा और पौरा ओपी दियारा इलाका में पड़ता है. पौरा की पुलिस को गश्ती के लिए भी पर्याप्त साधन नहीं है.

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