दोषी कर्मियों के विरुद्ध दिये गये कार्रवाई के आदेश
खगड़िया : सरकारी जमीन के बंदरबांट का सिलसिला जारी है. एक बार फिर सरकारी जमीन की जमाबंदी रैयत के नाम से कायम किये जाने का मामला सामने आया है. पहले इस जमीन को बेचा गया था.
फिर सरकारी बाबुओं की कृपा से इसी जमीन की जमाबंदी कायम कर दी गयी. सरकारी जमीन की जमाबंदी कायम करने का मामला गोगरी प्रखंड के कोयला मौजा से जुड़ा हुआ है. हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गैर मजरूआ आम(सड़क) श्रेणी की उक्त सरकारी जमीन की बिक्री कब की गयी थी तथा किन सीओ, सीआई तथा हल्का कर्मचारी के कार्यकाल में इस जमीन की जमाबंदी कायम की गयी थी. लेकिन इस मामले में अब कार्रवाई के आदेश दिये गये हैं.
महादलित बसे हैं जमीन पर : जिस सरकारी जमीन की पहले बिक्री हो गयी तथा फिर जमाबंदी कायम की गयी वह जमीन न तो विक्रेता के कब्जे में थी और ना ही खरीदार के कब्जे में है. यह जमीन वर्षों से महादलित के कब्जे में है. जिस पर वे रहते आ रहे हैं. बताया जाता है कि महादलित परिवार को उक्त जमीन से हटाने की साजिश की गयी है. तो यह कहना गलत नहीं होगा. कारण किसी भी खरीदार की जमीन की जमाबंदी दखल कब्जे के आधार भी होती है.
कहते हैं गोगरी सीओ
गोगरी सीओ चंदन कुमार ने बातया कि जांच में यह बाते सामने आई थी की उक्त जमीन गैर मजरूआ आम(सड़क) श्रेणी की है. जिस पर महादलितों का दखल कब्जा है. जिसकी जमाबंदी विपक्षी विनोद शर्मा ने करायी है. इस जमीन को पिपरपांती के रंजीत सिंह के द्वारा अवैध पूर्वक बेचा गया था. फिलहाल इस जमीन की कायम जमाबंदी को रद करने का प्रस्ताव वरीय पदाधिकारी के पास भेजा गया है. जमाबंदी रद होने के उपरांत नियमानुसार महादलित पर्चा उपलब्ध कराया जायेगा.
कहते हैं डीपीजीआरओ
इधर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विजय कुमार सिंह ने कहा कि गोगरी सीओ के रिपोर्ट से स्पष्ट है कि सरकारी जमीन की जमाबंदी कायम की गयी है. जमाबंदी रद करने के साथ साथ इस कार्य में शामिल कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई भी अनिवार्य है. नियम के विपरीत कार्य किये गये हैं. श्री सिंह ने बताया कि गोगरी डीसीएलआर को इस मामले की विस्तृत जांच कर दोषी कर्मी व पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार के पास भेजने का निर्देश दिया गया है. साथ ही 28 फरवरी तक डीसीएलआर से रिपोर्ट मांगी गयी है कि उन्होंने इस मामले में क्या कार्रवाई की है.
