खगडिया : या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रावृता। या वीणा वर दण्ड मंडित करा या श्वेत पद्मासना। या ब्रह्माच्युत्त शंकर: प्रभृतिर्भि देवै सदा वन्दिता। सा माम पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्या पहा। ।
इस बार वीणावादिनी मां सरस्वती छात्र-छात्राओं के लिए खुशखबरी लेकर आ रही हैं. मां सरस्वती मनोकामनाएं पूर्ण करेंगी. क्योंकि मां सरस्वती की पूजा एक फरवरी को सर्वार्थसिद्धि योग में होने जा रही हैं. ज्ञान एवं वाणी के बिना संसार की कल्पना करना भी असंभव है. माता सरस्वती इनकी देवी हैं. वसंत पंचमी के मां सरस्वती की पूजा की प्रथा सदियों से चलती आ रही हैं. सृष्टि के निर्माण के समय माता सरस्वती बसंत पंचमी के दिन प्रकट हुई थी. भगवान ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि बनायी गयी. भगवान विष्णु के आह्वान पर माता सरस्वती प्रकट होकर अपनी वीणा से सृष्टि में स्वर भरने का कार्य किया. जिसे हम ज्ञान एवं वाणी की देवी वीणापाणि भी कहते हैं.
क्या कहते हैं पंडितगण
संसार पुर गांव निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर ने बताया कि मिथिला विश्वविद्यालय पंचांग के मुताबिक पंचमी तिथि का प्रवेश 31 जनवरी की रात्रि मंगलवार को तीन बजकर 35 मिनट पर हैं. एवं एक फरवरी बुधवार रात्रि दो बजकर 23 मिनट तक पंचमी तिथि हैं. एक फरवरी बुधवार को दिन भर पंचमी तिथि हैं . बुधवार को उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र एवं सर्वार्थसिद्धि योग हैं.मां सरस्वती की पूजा को लेकर शिक्षा संस्थानों में तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं. वहीं वसंत पंचमी के साथ वसंत ऋतु का आगाज हो जाता हैं.पंचतत्व अपना प्रकोप छोड़कर सुहावने रूप में प्रकट होते हैं. जल ,वायु, धरती, आकाश और अग्नि अपना मोहक रूप दिखाते हैं. प्रकृति का नव सौन्दर्य देखने को मिलता हैं.
