डेढ़ वर्ष पूर्व बनी थी योजना परेशानी. गरीबों को कलस्टर में बसाने की योजना फ्लॉप

राज्य सरकार द्वारा डेढ़ वर्ष पूर्व बनाई गई यह महत्वाकांक्षी योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है. इसका मुख्य कारण भूमिहीन गरीबों का अपनी कथित अनाधिकृत बास स्थल को भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं होने को बताया जा रहा है. खगड़िया : ग्रामीण क्षेत्रों के भूमिहीन महादलित परिवारों एवं अन्य सुयोग्य श्रेणी […]

राज्य सरकार द्वारा डेढ़ वर्ष पूर्व बनाई गई यह महत्वाकांक्षी योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है. इसका मुख्य कारण भूमिहीन गरीबों का अपनी कथित अनाधिकृत बास स्थल को भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं होने को बताया जा रहा है.

खगड़िया : ग्रामीण क्षेत्रों के भूमिहीन महादलित परिवारों एवं अन्य सुयोग्य श्रेणी के भूमिहीन परिवारों को कलस्टर में बसाने की योजना दम तोड़ रही है. राज्य सरकार द्वारा डेढ़ वर्ष पूर्व बनाई गई यह महत्वाकांक्षी योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है. इसका मुख्य कारण भूमिहीन गरीबों का अपनी कथित अनाधिकृत बास स्थल को भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं होने को बताया जा रहा है. जबकि भूमिहीन गरीबों को कलस्टर में बसाने के लिए राज्य सरकार बेहतर योजना एक साल पहले ही बना चुकी है. कलस्टर में बसाने वाली योजना के तहत प्रत्येक भूमिहीन परिवारों को पांच डिसमल जमीन उपलब्ध कराया जाना है. एक कलस्टर में 20 भूमिहीन गरीबों को बसाने की योजना है. कलस्टर में बसाने पर आंतरिक सड़क व सामुदायिक भवन के लिए अलग से जमीन की व्यवस्था करने की भी योजना है.
पहले वाला बदल गया नियम : पहले भूमिहीन महादलित परिवारों के बास हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति परिवार 03 डिसमल गैर मजरुआ आम भूमि की नि:शुल्क बंदोबस्ती करने की शक्ति प्रमंडलीय आयुक्त के पास थी. इसी प्रकार अन्य सुयोग्य श्रेणी मसलन-अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग व अति पिछड़ा वर्ग के भूमिहीन परिवारों को बास हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में तीन डिसमल गैरमजरूआ खास भूमि की बंदोबस्ती करने की शक्ति एसडीओ तथा गैर मजरुआ आम भूमि मामले में बंदोबस्ती की शक्ति सरकार के पास थी. लेकिन डेढ़ साल पहले सभी मामलों में भूमिहीन परिवारों को ग्रामीण क्षेत्रों में पांच डिसमिल बास हेतु भूमि बंदोबस्त करने की शक्ति समाहर्ता में निहित कर दिया गया.
ग्रामीण क्षेत्रों के भूमिहीन महादलित परिवारों एवं अन्य सुयोग्य श्रेणी के भूमिहीन परिवारों को बास हेतु 03 डिसमिल की जगह पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय डेढ़ साल पूर्व लिया गया. इस संबंध में राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा संकल्प भी जारी किया जा चुका है. पहले भूमिहीन महादलित एवं सुयोग्य श्रेणी के परिवारों को बास हेतु गैरमजरुआ आम भूमि की बंदोबस्ती क्रमश: प्रमंडलीय आयुक्त एवं सरकार के स्तर से की जाती थी, जो एक लंबी प्रक्रिया थी. लेकिन, जनहित को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए तथा एकरूपता लाने हेतु विभागीय परिपत्र में संशोधन भी किया जा चुका है. सरकार ने भूमिहीन महादलित परिवारों एवं अन्य सुयोग्य श्रेणी के भूमिहीन परिवारों को बास हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में पांच डिसमिल गैर मजरुआ आम भूमि की बंदोबस्ती की प्रक्रिया को आसान बनाने हेतु उक्त बंदोबस्ती की शक्ति समाहर्ता में भी निहित कर चुका है.
सरकारी जमीन नहीं रहने पर खरीद कर देने की थी योजना
सभी श्रेणी के सुयोग्य बास विहीन परिवारों को बास हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में नि:शुल्क पांच डिसमिल भूमि उपलब्ध कराने की योजना तो डेढ़ साल पहले बनाई गई. जबकि कलस्टर में ऐसे 20 परिवारों को बसाने हेतु प्रति परिवार पांच डिसमिल की दर से कुल 100 डिसमिल के अलावा आंतरिक सड़क एवं सामुदायिक भवन हेतु अलग से 20 डिसमिल जमीन की बंदोबस्ती करने की योजना भी बनाई जा चुकी है. इसके लिए गैर मजरुआ आम व खास जमीन का उपयोग किए जाने का निर्णय लिया गया. इस तरह की जमीन उपलब्ध नहीं होने पर जमीन की क्रय करने की भी नीति बनाई गई. लेकिन डेढ़ साल बाद भी गरीबों को कलस्टर में बसाने की योजना जिले में धरातल पर नहीं उतर पाई है. हालांकि डीएम जय सिंह के विशेष पहल के बाद भूमिहीन गरीबों को बास हेतु पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना जतायी जा रही है.

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