कात्यायनी स्थान बनेगा पर्यटन हब

पहल. दूर-दराज से धमारा आते हैं श्रद्धालु कोसी की गोद में अवस्थित सुप्रसिद्ध मां कात्यायनी स्थान को पर्यटन के मानचित्र पर अंकित करने को लेकर सरकार द्वारा ‘कात्यायनी महोत्सव’ शुरू करने की स्वीकृति मिल गयी है. इसके लिए तीन लाख रुपये का आवंटन भी जिले को प्राप्त हो गया है. खगड़िया : मानसी रेलखंड के […]

पहल. दूर-दराज से धमारा आते हैं श्रद्धालु

कोसी की गोद में अवस्थित सुप्रसिद्ध मां कात्यायनी स्थान को पर्यटन के मानचित्र पर अंकित करने को लेकर सरकार द्वारा ‘कात्यायनी महोत्सव’ शुरू करने की स्वीकृति मिल गयी है. इसके लिए तीन लाख रुपये का आवंटन भी जिले को प्राप्त हो गया है.
खगड़िया : मानसी रेलखंड के धमाराघाट रेलवे स्टेशन से दक्षिण और सहरसा-खगड़िया जिले के सीमा पर अवस्थित मां कात्यायनी स्थान देश के पर्यटन स्थल में शुमार होने की उम्मीद दिख रही है. धमारा घाट स्टेशन के निकट रोहियार पंचायत अंतर्गत बंगलिया में ‘कोसी के गोद’ अवस्थित सुप्रसिद्ध मां कात्यायनी स्थान को पर्यटन के मानचित्र पर अंकित करने को लेकर सरकार द्वारा ‘कात्यायनी महोत्सव’ शुरू करने की स्वीकृति मिल गयी है. इसके लिए तीन लाख रुपये का आवंटन भी जिला को प्राप्त हो गया है. महोत्सव की तैयारी के बीच अभी से लोगों में महोत्सव की चर्चा होने लगी है, कार्यक्रम जनवरी के मध्य होने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
तैयारियों का दौर शुरू
‘कात्यायनी महोत्सव’ के संबंध में कात्यायनी न्यास समिति के उपाध्यक्ष युवराज शंभु कहते हैं कि धार्मिक न्यास समित के अध्यक्ष द्वारा इस महोत्सव को सफलता पूर्वक मनाने का निर्देश दिया गया है.
महोत्सव मनाने की तैयारी आरंभ कर दी गयी है, जनवरी में इस महोत्सव को मनाया जायेगा, अभी तिथि का निर्धारण नहीं किया गया है. कात्यायनी न्यास समिति के सदस्यों की मानें तो पर्यटन स्थल घोषित किये जाने की दिशा में यह पहला सशक्त कदम है.
कहते हैं न्यास के उपाध्यक्ष : न्यास समिति के उपाध्यक्ष बताते है कि मंदिर न्यास समिति और जिला के तमाम पदाधिकारी भी इसके लिए काफी प्रयासरत रहे जिसका परिणाम यह है. कात्यायनी न्यास समिति के सदस्यों का कहना है कि सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कात्यायनी स्थान को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने को लेकर भी हम सभी प्रयासरत हैं.
मंदिर में पूजा-अर्चना करने वालों की उमड़ती है भीड़. खबर
कात्यायनी मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष युवराज शंभु बताते है कि महोत्सव को जनवरी में मकर संक्रांति पर्व के निकट मनाने का विचार चल रहा है, साथ ही महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से करवाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि दो दिवसीय महोत्सव के दौरान मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया जायेगा और कार्यक्रम सहरसा और खगड़िया जिले के लोगो से गुलजार होगा. उन्होंने कहा कि इस शक्तिपीठ को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग की जा रही है, लेकिन अब ऐसा लग रहा है जैसे हमारी इस बहुप्रतिक्षित मांग को पूरा कर दिया जाएगा, क्योंकि कात्यायनी महोत्सव मनाये जाने के बाद इस ओर सभी का ध्यान आकृष्ट होगा. बहरहाल, कात्यायनी महोत्सव मनाने की तैयारी को लेकर न सिर्फ कात्यायनी न्यास समिति अपितु क्षेत्र वासियों में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है.
मंदिर का क्या है इतिहास
दिल्ली के महरौली से आये सेंगर वंश के राजा मंगल सिंह को मुगल बादशाह अकबर ने 1595 मे चौथम तहसील देकर मुरार शाही की उपाधि से नवाजा था. राजा व उनके मित्र श्रीपत जी महाराज को यह पवित्र स्थल शिकार व गौ चराने के क्रम में मिला. किंवदंती है कि श्रीपत जी महाराज हजारों गाय-भैंसों के मालिक थे. चरने के क्रम में उक्त स्थल पर गाय स्वत: दूध देने लगती थी. जिसे देखकर दोनों को आश्चर्य होता था. लोगों का कहना है कि राजा को मां ने स्वप्न में दर्शन देकर वहां मंदिर बनाने का आदेश दिया था. इसी पर दोनों ने उक्त स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया. खुदाई के क्रम में उस स्थान से मां का हाथ मिला. जिसका पूजन आज भी किया जा रहा है. मां कात्यायनी के पूजा के बाद यहां आज श्रीपत जी महाराज की भी पूजा की जाती है. इस इलाके के लोकगीतों मे भी राजा मंगल सिंह और श्रीपत जी की चर्चा होती है. से जुड़े लोग बताते है कि लोगों को शारीरिक कष्ट एवं पशुओं (गाय, भैंस, बकरी) के रोगों के निवारण के लिए श्रद्धालु मां कात्यायनी से याचना करते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर मां को दूध का चढ़ावा चढ़ाता है. रास्ते में घंटो समय लगने के बावजूद चढावा का दूध जमता या फटता नहीं है. मां कात्यायनी धार्मिक न्यास समिति के उपाध्यक्ष युवराज शंभु बताते है कि अन्य शक्तिपीठों की तरह इस शक्तिपीठ का भी काफी महत्ता है और इस आयोजन के बाद पर्यटन के मानचित्र पर आने की संभावना है.

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