जुगाड़ पुल पर चार पहिये वाहन का परिचालन सोमवार से शुरू हो गया. हल्के वाहनों के परिचालन बगैर सैरात बंदोबस्ती के आनन-फानन में शुरू करा दिये जाने से दूसरे गुट के नाव संचालक में नाराजगी पनपने लगा है.
बेलदौर : डुमरी पुल के समीप बनी नाव की जुगाड़ पुल पर चार पहिये वाहन का परिचालन सोमवार से शुरू हो गया. हल्के वाहनों के परिचालन शुरू होने से आवागमन संकट से जुझ रहे लोगों को थोड़ी राहत मिली है, तो वहीं हल्के वाहनों के परिचालन बगैर सैरात बंदोबस्ती के आनन-फानन में शुरू करा दिये जाने से दूसरे गुट के नाव संचालक में नाराजगी पनपने लगा है. कमोवेश आमलोगों के बीच भी चर्चा थी कि सैरात बंदोबस्ती के बाद ही इस जुगाड़ पुल पर वाहनों का शुरू हो पायेगा एवं पूर्व के तरह ही पांव पैदल लोग एवं साइकिल चालकों को इस पुल पर नि:शुल्क पार कराया जायेगा,
लेकिन सैरात बंदोबस्ती हुए बगैर जुगाड़ पुल पर परिचालन शुरू हो जाने से वाहन चालक समेत आमलोगों को आशंका है कि सरकारी नियंत्रण नहीं रहने से नाव संचालकों के मनमानी को झेलना अब आम लोगों की नियति बन जायेगी. जुगाड़ पुल से नदी पार करने वाले लोगों ने बताया कि नि:शुल्क सेवा दे रही सरकारी नाव बंद हो जाने से पांव पैदल 10 रुपया, बाइक चालक समेत तीन सवार को 30 रुपये व हल्के चार पहिया वाहन को 300 रुपये देने पड़ते है. इससे लोगों को नदी पार करने में कितनी राहत मिल रही है. इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. हालांकि लोगों को उम्मीद थी कि बीते फरवरी 2015 में कोसी नदी पर बनाये गये जुगाड़ पुल की लागत से आधी लागत में इसबार पुल बन गया है. इसका फायदा आमलोग समेत वाहन चालकों को होगा, लेकिन परिणाम इसके विपरीत है. इस बार पांव पैदल लोगों को भी जुगाड़ पुल पार करने में 10 रुपये चुकाने पड़ते है. इससे आमलोगों में नाराजगी है.
कहते हैं जुगाड पुल संचालक
जुगाड़ पुल संचालक रोहिण सहनी ने बताया कि 15 से लेकर 17 दिसंबर तक जिले में इस घाट के बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी करवायी जायेगी. बंदोबस्ती में सफल होने के बाद आमलोगों के सुविधाओं को ध्यान में रखा जायेगा.
