हालात . अलौली पीएचसी में मरीज के बेड पर महीनों से नहीं बिछी चादर
प्रभारी से लेकर कई कर्मचारी तक बदल गयेलेकिन अलौली पीएचसी के बदतर हालात नहीं बदल पाये हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भरती होने पर न बेड पर चादर मिलेगा और न ही ओढ़ने के लिए कंबल.
खगड़िया : गर आप अलौली अस्पताल (पीएचसी) में इलाज करवाने जा रहे हैं तो चादर-कंबल साथ में लेकर आना होगा. यहां मिलने वाली सरकारी सुविधा बंद है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भरती होने पर ना बेड पर चादर मिलेगा और ना ही ओढ़ने के लिये कंबल. जब बड़े अस्पताल का यह हाल है तो छोटे अस्पताल में इसकी उम्मीद करना भी मुर्खता है. इतना ही नहीं दिन के 11 बजकर 47 मिनट हो गये थे लेकिन पीएचसी प्रभारी और बीएचएम का कोई अता-पता नहीं था.
ऐसे में छोटे कर्मचारी की मनमानी तो बढ़ेगी ही. जिसका खामियाजा तो आखिर में उन गरीबों को भुगतना पड़ेगा जिसके पास सरकारी अस्पताल जाने के अलावा और कोई चारा भी नहीं है. किसी तरह इलाज हो जाय बस इतना ही उन गरीबों के लिये काफी है. मौके पर मौजूद कई मरीजों की जुबानी पीएचसी की कहानी सुनकर तो यही कहेंगे कब सुधरेंगे सरकारी अस्पताल.
प्लास्टिक का बोरा ओढ कर ठंड से बच रही प्रसूता : पीएचसी के प्रसव कक्ष में भरती प्रसूता व परिजनों की जुबानी, पीएचसी के बदतर हालात की कहानी सुनकर रोंगटे खड़े हो जायेंगे. कड़ाके की ठंड के बीच प्रसव कक्ष में भरती कंचन देवी, सविता देवी जैसे आधा दर्जन मरीज बच्चों को आंचल की ओट में छिपाकर नंगे बेड पर सिकुड़ कर लेटी हुई थी. चादर -कंबल के बारे में पूछने पर एक ही साथ वहां मौजूद प्रसूता के परिजन एक साथ बोल उठती है कि यहां पर सीधा फरमान सुनाया गया है कि इलाज करवाना है
तो यह सब घर से साथ में लेकर आना होगा. ठंड से बचने के लिये प्लास्टिक का बोरा ओढ़ना पड़ रहा है. ज्यादा बोलते हैं तो मैडम (ड्यूटी पर तैनात सिस्टर) कहतीं है कि इलाज करवाना है कि नहीं. पिछली बार भी आये थे तो यहां बेड पर चादर नहीं मिला था. इधर, प्रसव कक्ष में तैनात एएनएम अर्चना कुमारी ने बताया कि हमलोग भी यही बात कर रहे थे. कहे हुए हैं, चादर मिलते ही बेड पर बिछा देंगे.
12 बजे लेट नहीं दो बजे भेंट नहीं :
अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ संजीव कुमार ट्रेन के टाइम के हिसाब से अस्पताल आते और जाते हैं. स्वास्थ्य प्रबंधक चेतन शर्मा भी इसमें पीछे नहीं है. आने जाने का अपना टाइम टेबल है. कब मुलाकात होगी कहना मुश्किल है. रात में रहने का तो सवाल ही नहीं उठता है. अलौली का माहौल ठीक नहीं होने का झांसा देकर उच्चाधिकारियों को भी इन्होंने मना लिया है. गुरुवार को भी ऐसे ही नजारे के दर्शन हुए. 11 बजकर 47 मिनट पीएचसी प्रभारी व बीएचएम नहीं पहुंचे थे. पूछने पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि आते ही होंगे.
स्पष्टीकरण हुआ तो झूठा जवाब देकर बच निकलना इनके बायें हाथ का खेल है. अभी हाल ही में प्रखंड प्रमुख के फरजी हस्ताक्षर के सहारे विधायक के निरीक्षण के वक्त ड्यूटी पर मौजूद रहने का झूठा जवाब देकर बीएचएम बच निकलना चाह रहे हैं. इस तरह की तरकीब के सहारे पहले भी बच निकलने की कहानी सामने आ चुकी है.
कोई कर्मचारी कार्रवाई के डर से वरीय अधिकारियों की पोल खोलकर नाराज नहीं करना चाहते हैं. इधर, उच्चाधिकारियों की लेटलतीफी देख कई कर्मचारी भी गायब रहते हैं. काफी कुरेदने पर ड्यूटी पर मौजूद एक स्वास्थ्यकर्मी ने कहा हमलोग ठहरे छोटे कर्मचारी, कैसे बतायें. इधर, पीएचसी प्रभारी को फोन करने पर रिसीव नहीं किया गया. इस कारण उनका पक्ष नहीं लिया जा सका है.
बेड पर चादर, कंबल देने के लिये कहने पर दीदी (नर्स) व बाबू (चिकित्सक) का सीधा फरमान सुनाते हैं कि यहां इलाज करवाना है तो यह सब घर से साथ में लेकर आइये. यहां कोई नहीं सुनता है. ज्यादा बोलने पर मैडम कहती है कि इलाज करवाना है कि नहीं, तो बस चुपचाप रहो.
कंचन देवी, हरिपुर, सविता देवी, भिखारी घाट.
चाहे पीएचसी प्रभारी हो या छोटे कर्मचारी सबको ड्यूटी समय पर आना है. बेड पर चादर व मरीजों को कंबल नहीं देना गंभीर बात है. पूरे मामले की जांच करवायी जायेगी.
डॉ अरुण कुमार सिंह, सिविल सर्जन.
चादर है ही नहीं तो देंगे कहां से. अभी यही तो बात कर रहे थे. सर को बोले हैं, चादर मिलते ही मरीज के बेड पर बिछा दिया जायेगा. कंबल नहीं मिलने से मरीज को परेशानी तो जरूर हो रही है.
अर्चना कुमारी, ड्यूटी पर तैनात एएनएम.
