दियारा का होगा विकास

सोनमनकी घाट पर 42.5 करोड़ की लागत से बने पुल का सीएस व उपमुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पटना से रिमोट दबा कर उद्घाटन किया. खगड़िया : सोनमनकी घाट पर 42.5 करोड़ की लागत से बने पुल का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को पटना से रिमोट दबा कर उद्घाटन किया. इस […]

सोनमनकी घाट पर 42.5 करोड़ की लागत से बने पुल का सीएस व उपमुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पटना से रिमोट दबा कर उद्घाटन किया.
खगड़िया : सोनमनकी घाट पर 42.5 करोड़ की लागत से बने पुल का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को पटना से रिमोट दबा कर उद्घाटन किया. इस अवसर पर सोनमनकी घाट पर महागंठबंधन के सदर विधायक पूनम देवी यादव, अलौली विधायक चंदन कुमार, विधान पार्षद सोनेलाल मेहता, जदयू जिला अध्यक्ष सुनील कुमार, पूर्व विधायक रामचन्द्र सादा आदि ने सोनमनकी घाट पर फीता काट कर पुल का उद्घाटन किया. इसके बाद समारोह का आयोजन किया गया. जिसमें नेताओं ने पुल के महत्व और नीतीश सरकार के विकास यात्रा का बखान किया.
दर्जनों गांवों के लोगों को मिलेगा लाभ: सोनमनकी पुल पर आवागमन शुरू होने के बाद दियारा में विकास के द्वार खुलेंगे. सोनमनकी पुल जिला मुख्यालय से उत्तर बागमती एवं सहरसा जिले के कोसी से दक्षिणी क्षेत्र के ऐसे इलाकों को जोड़ेगी, जो कोसी, कमला, व बागमती का दियारा क्षेत्र है.
इस पुल की मांग वर्षों से की जारही थी. पुल के निर्माण से जिले के उत्तर माड़र, सोनमनकी, मधुरा, छमसिया, बेलोर, छिमा, बोझगसका, खैरी खुटहा, सिमराहा, मोरकाही, अमौसी, मोहनपुर, भमरी सहित दर्जनों गांव के लोगों को लाभ होगा.
समयसीमा से पहले पुल बन कर तैयार : 16 नवंबर 2013 में बिहार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोनमनकी घाट पर एक सभा का आयोजन कर इस पुल का शिलान्यास किया था. 42.5 करोड़ की लागत से बनी 457 मीटर लंबी 24 मीटर चौड़ी तथा 19 पायों वाला यह टू लेन पुल है.
इस पुल के लिए 30 माह का समय निर्धारित किया गया था. लेकिन पुल समय से पहले बन कर तैयार हो गया. बता दें कि जिला मुख्यालय के उत्तरी क्षेत्र एवं सहरसा का दक्षिणी क्षेत्र कोसी और बागमती का अत्यंत ही उपजाऊ भूमि है. यहां 80 प्रतिशत महादलित परिवार 156 प्रतिशत अत्यंत पिछड़ी जाति एवं शेष पांच प्रतिशत अन्य जाति के लोग इस इलाके में रहते हैं. इस क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक आबादी खेतिहर मजदूर हैं.
क्षेत्र की एक बड़ी आबादी नदी के कारण जिला मुख्यालय से कटा हुआ था. क्षेत्र के लोगों को बाढ़ के दिनों बड़े स्तर पर जन धन की नुकसान सहन करना पड़ता था. आज भी यहां के लोग मुख्य रूप से घोड़ा और बैलगाड़ी पर ही निर्भर है. क्षेत्र के लोगों को पुल के शिलान्यास से विकास की आस जगी थी. अब पुल के उद्घाटन से विकास का मार्ग साकार होता दिख रहा है.

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