कोसी का जलस्तर बढ़ा आवागमन पर संकट

बेलदौर (खगड़िया) : मानसून की बारिश के बाद कोसी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है. नाविकों को कोसी नदी में नाव चलाना मुश्किल हो रहा है. बीते मंगलवार को हुई बारिश के बाद कोसी के जलस्तर में तीन फीट की बढ़ोतरी हुई है. नदी के जलस्तर मे बढ़ोतरी के कारण इसकी चैड़ाई बढ […]

बेलदौर (खगड़िया) : मानसून की बारिश के बाद कोसी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है. नाविकों को कोसी नदी में नाव चलाना मुश्किल हो रहा है. बीते मंगलवार को हुई बारिश के बाद कोसी के जलस्तर में तीन फीट की बढ़ोतरी हुई है. नदी के जलस्तर मे बढ़ोतरी के कारण इसकी चैड़ाई बढ गयी है. नाव संचालको ने बताया कि महज दो फीट की बढ़ोतरी होने पर नाव का ठहराव डुमरी घाट पर होने लगेगा.

इसके कारण लोगों को मुख्य सड़क से लगभग दो किलोमीटर दूर नाव से उतरना होगा. नदी पार करने में लोगों को डेढ़ से दो घंटे लगेंगे.

इन बढ़ते संकटों से लोगों को लगभग सितंबर माह तक जूझने की संभावना है. हालांकि जिला प्रशासन ने लोगों के आवागमन संकट को देखते हुए एनएच विभाग द्वारा 4 नाव का परिचालन करा कर काफी राहत दी है. इसके बावजूद लाखों के आवादी के लिए महज 4 नाव का ही सरकारी स्तर पर परिचालन ऊंट के मुंह में जीरा के सामान साबित हो रहा है. विवश हो लोगों को ससमय जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए निजी नाव पर ही निर्भर रहना पड़ता है. सूर्यास्त होने के बाद तो लोगो की परेशानी और अधिक बढ जाती है.

नाव संचालक अपनी कमाई एवं लोगों की आवश्यकता को ध्यान में रख रात के अंधेरे में भी रिस्क लेकर नदी पार कराते है. लेकिन इस दौरान लोगों को नदी पार करने के संभावित खतरे के भय से सांसे अटकी रहती है. राहत नदी पार करने के बाद ही मिलती है. अगर नदी के जलस्तर मे हो रही लगातार बढ़ोतरी को गंभीरता से लेकर आवश्यक ऐहतियात नहीं बरती गयी तो संभावित दुर्घटनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है. विदित हो कि बीते 5 वर्षो से डुमरी पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों को आवागमन की विकट संकट के बीच जान जोखिम में डाल कर नदी पार करना पड़ता है.

प्रदेश सरकार ने कोसी वासियों के परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए वर्ष 2011 में साढ़े सतरह करोड़ की लागत से डुमरी पुल के सामानांतर स्टील पुल बनाकर 19 अगस्त 2014 तक आवागमन की छमासी सेवा देकर लोगों को काफी राहत दिया था. स्टील ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद नाव से नदी पार करना नियति बन चुकी है. इसके कारण इलाके का विकास दो दशक पीछे चला गया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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