फर्जी डिग्री से बन गयी एएनएम!

स्वास्थ्य विभाग की सेहत इन दिनों ठीक नहीं चल रही है. भ्रष्टाचार व लापरवाही के विभिन्न मामलों में स्पष्टीकरण का दिखावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इतनी भी फुरसत नहीं हैं कि यह जांच करें कि स्पष्टीकरण का जवाब मिला या नहीं. ऐसे में कार्रवाई की उम्मीद करना बेमानी होगी. फर्जी विद्यालय की […]

स्वास्थ्य विभाग की सेहत इन दिनों ठीक नहीं चल रही है. भ्रष्टाचार व लापरवाही के विभिन्न मामलों में स्पष्टीकरण का दिखावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इतनी भी फुरसत नहीं हैं कि यह जांच करें कि स्पष्टीकरण का जवाब मिला या नहीं. ऐसे में कार्रवाई की उम्मीद करना बेमानी होगी. फर्जी विद्यालय की डिग्री पर बहाल एएनएम के प्रमाण पत्रों की जांच तक करना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मुनासिब नहीं समझा है.

खगडि़या : बिहार सरकार के द्वारा जारी सूची के अनुसार फर्जी विद्यालय की सूची में शामिल प्रयाग महिला विद्यापीठ इलाहाबाद से प्राप्त मैट्रिक समकक्ष परीक्षा की डिग्री के आधार पर एएनएम में बहाली का खुलासा हुआ है.

पूरे मामले पर से परदा उस वक्त हटा जब सूचना के अधिकार के तहत सूचना दी गयी. इसमें अलौली प्रखंड के स्वास्थ्य उपकेंद्र सनोखर में कार्यरत एएनएम ममता कुमारी की मैट्रिक समकक्ष (विद्याविनोदिनी) की डिग्री के आधार पर बहाली होने की बात कही गयी है. इधर, पूरे मामले के भंडाफोड़ करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता दीपक कुमार अकेला के दावे की मानें तो स्वास्थ्य महकमा भी सवालों के घेरे में है.
सब कुछ जान कर भी अनजान बना विभाग
आरटीआई कार्यकर्ता दीपक कुमार अकेला ने बताया कि एएनएम बहाली में फर्जीवाड़ा के बारे में सारे दस्तावेज लगाते हुए कार्रवाई के लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आवेदन दिया गया, लेकिन कार्रवाई तो दूर जांच तक करना विभाग ने मुनासिब नहीं समझा.
सूबे के मुखिया भले ही भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लगाने का दावा करते हों, लेकिन खगडि़या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इन बातों से शायद कोई लेना देना नहीं है. फर्जी बंध्याकरण ऑपरेशन हो या इलाज के एवज में स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अवैध उगाही का मामला हो या जननी बाल सुरक्षा योजना में कमीशनखोरी का. ऐसे कई मामलों में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कार्रवाई के नाम पर स्पष्टीकरण का दिखावा किये जाने से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं.
स्वास्थ्य विभाग की सेहत इन दिनों ठीक नहीं चल रही है. भ्रष्टाचार व लापरवाही के विभिन्न मामलों में स्पष्टीकरण का दिखावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इतनी भी फुरसत नहीं हैं कि यह जांच करें कि स्पष्टीकरण का जवाब मिला या नहीं. ऐसे में कार्रवाई की उम्मीद करना बेमानी होगी. फर्जी विद्यालय की डिग्री पर बहाल एएनएम के प्रमाण पत्रों की जांच तक करना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मुनासिब नहीं समझा है.
खगडि़या : बिहार सरकार के द्वारा जारी सूची के अनुसार फर्जी विद्यालय की सूची में शामिल प्रयाग महिला विद्यापीठ इलाहाबाद से प्राप्त मैट्रिक समकक्ष परीक्षा की डिग्री के आधार पर एएनएम में बहाली का खुलासा हुआ है.
पूरे मामले पर से परदा उस वक्त हटा जब सूचना के अधिकार के तहत सूचना दी गयी. इसमें अलौली प्रखंड के स्वास्थ्य उपकेंद्र सनोखर में कार्यरत एएनएम ममता कुमारी की मैट्रिक समकक्ष (विद्याविनोदिनी) की डिग्री के आधार पर बहाली होने की बात कही गयी है. इधर, पूरे मामले के भंडाफोड़ करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता दीपक कुमार अकेला के दावे की मानें तो स्वास्थ्य महकमा भी सवालों के घेरे में है.
सब कुछ जान कर भी अनजान बना विभाग
आरटीआई कार्यकर्ता दीपक कुमार अकेला ने बताया कि एएनएम बहाली में फर्जीवाड़ा के बारे में सारे दस्तावेज लगाते हुए कार्रवाई के लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आवेदन दिया गया, लेकिन कार्रवाई तो दूर जांच तक करना विभाग ने मुनासिब नहीं समझा.
सूबे के मुखिया भले ही भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लगाने का दावा करते हों, लेकिन खगडि़या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इन बातों से शायद कोई लेना देना नहीं है. फर्जी बंध्याकरण ऑपरेशन हो या इलाज के एवज में स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अवैध उगाही का मामला हो या जननी बाल सुरक्षा योजना में कमीशनखोरी का. ऐसे कई मामलों में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कार्रवाई के नाम पर स्पष्टीकरण का दिखावा किये जाने से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं.
हाल के दिनों में स्वास्थ्य विभाग में चल रही कारगुजारी का मामला तूल पकड़ने के बाद किरकिरी का सामना कर रहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मोबाइल पर भी कॉल रिसीव करने से कतराने लगे हैं. मंगलवार को पूरे मामले में सिविल सर्जन का पक्ष जानने के लिये मोबाइल पर कॉल करने पर रिसीव नहीं किया गया. बताया जाता है कि स्पष्टीकरण करके सो जाने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को यह जानने की भी फुरसत नहीं है कि जवाब मिला या नहीं .
ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है. ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद भी स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया गया है. जो स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली की पोल खोलने के लिए काफी है. दूसरी ओर भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों पर सिविल सर्जन द्वारा जवाब देने में आनाकानी करने से अनियमितता की आशंका बढ़ती जा रही है.

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