परबत्ता : प्रखंड के पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों की लापरवाही के कारण विगत कई वर्षों में कोई परिवर्तन नहीं आया है. प्रखंड में वर्ष 2015 में किसानों को फसल क्षति के मुआवजा के तौर पर राशि वितरण के लिये 3 करोड़ 95 लाख रुपये सरकार द्वारा भेजा गया था. इस राशि के पारदर्शितापूर्ण भुगतान के लिये तात्कालीन जिला पदाधिकारी राजीव रोशन ने दिन रात एक कर दिया था.
परिणाम स्वरूप लाभुकों को आरटीजीएस के माध्यम से सीधे खाता में राशि के हस्तांतरण करने का आदेश दिया गया. इसके बावजूद इसमें अनियमितता की कई शिकायतें आयीं. किसान सलाहकारों द्वारा लाभुक किसानों की सूची बनाने में रुपये मांगे जाने की शिकायतें मिलती रही थी. लेकिन सैकड़ों किसानों को रुपये देकर सूची में नाम जुड़वाने की जुगत भी काम नहीं आयी.
परेशान हैं प्रभावित किसान: फसल क्षति मुआवजा की राह देख रहे किसान बीते दस माह से प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाकर परेशान हैं. किसानों ने बताया कि प्रखंड कर्मियों द्वारा राशि वितरण में जान बूझकर देरी की जा रही है. भरतखंड निवासी नंदन मंडल तथा जितेन्द्र सिंह, कन्हैयाचक निवासी प्रमोद चौधरी ने बताया कि वे विगत दस माह से प्रखंड के चक्कर लगा रहे हैं.
बैंकों से लौटी थी एडवाइस: प्रखंड के किसानों को सीधे खाता में राशि भुगतान के लिये उनके बैंक खाता का नंबर लिया गया था. सभी किसानों के खाते में मुआवजा की राशि भेजी जानी थी. बैंकों में इस भुगतान के लिये भेजी गयी राशि के एडवाइस में इतनी त्रुटियां थी कि अधिकांश बैंकों ने इसे बिना भुगतान के ही लौटा दिया.
बीस प्रतिशत मांगे जाने का आरोप: कई किसान दबी जुबान से यह चर्चा करते हैं कि मुआवजा वितरण को कमीशनखोरी की बीमारी लग गयी है. यही वजह है कि राशि धीरे धीरे भेजी जा रही है. कुछ लोगों को इस हेतु राशि मांगते हुए मुआवजा दिलाने का प्रलोभन देते हुए देखा गया है.
शिकायतों का निवारण की जगह मुकदमा
फसल क्षति मुआवजा में अनियमितता की शिकायत पर दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की बजाय किसानों पर ही मुकदमा कर दिया गया. इस मामले में 22 जून 2015 को गोविंदपुर पंचायत के कई किसानों ने जब बीडीओ के समक्ष मामले को उठाया तो कहा सुनी हो गयी. इस मामले में बीडीओ ने किसानों पर मुकदमा कर दिया.
