जिले के सभी सरकारी स्कूलों का सच जानने निकलेगी अधिकारियों की टोली
शिक्षा विभाग के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी को मिला निरीक्षण का टास्क
डीइओ से लेकर बीइओ तक स्कूलों का निरीक्षण कर डीएम को करेंगे रिपोर्ट
जिले के 88 संकुलों के अधीन सभी विद्यालयों की सूचीवार अधिकारियों की बनी लिस्ट
अब स्कूल से गायब रह कर वेतन की मलाई खाने वाले शिक्षकों पर कसेगा शिकंजा
पठन-पाठन से लेकर सरकारी योजनाओं के वितरण पर अधिकारियों की रहेगी पैनी नजर
खगड़िया : महीनों-महीनों विद्यालय से गायब रह कर वेतन के मजे लेने वाले लापरवाह गुरुजी के लिए बुरी खबर है. डीएम साकेत कुमार ने सरकारी स्कूलों की दुर्दशा जान कर सुधारात्मक कदम उठाने के लिए शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों को टास्क सौंपा है. इसके बाद एक डीइओ, पांच-पांच डीपीओ व बीइओ से लैस धावा दल अब सरकारी स्कूलों का सच जानने की कसरत में जुट गये हैं.
इधर, 88 संकुल के अधीन करीब 1100 विद्यालयों की सूचीवार अधिकारियों की लिस्ट बन गयी है कि कौन अधिकारी किस विद्यालय में धावा बोलेंगे. ऐसे में अब अधिकारी जब सरकारी स्कूलों के दरवाजे पर दस्तक देंगे, तो मजबूरन गायब रहने वाले शिक्षकों को मौजूद रहना ही होगा.
एमडीएम से लेकर पठन-पाठन पर नजर
डीइओ डॉ ब्रज किशोर सिंह ने बताया निरीक्षण के दौरान सरकारी स्कूलों में एमडीएम से लेकर पठन-पाठन के सच से अधिकारी रूबरू होंगे. कुल सात प्रखंडों के पांच बीइओ एक दूसरे के इलाके में स्थित स्कूल पर धावा बोल कर बच्चों से सरकारी स्कूलों का सच जानेंगे. इसके अलावा पांच डीपीओ को भी विद्यालयवार निरीक्षण करने का टास्क दिया गया है. स्वयं जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी करीब पांच दर्जन स्कूलों का निरीक्षण कर डीएम को रिपोर्ट करना होगा. इधर, डीएम के आदेशानुसार विद्यालय में पठन-पाठन से लेकर सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति से अधिकारी अवगत होंगे.
कई स्कूलों में पहली बार पहुंचेंगे अफसर
सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कटिबद्ध दिख रहे डीएम साकेत कुमार के कड़े निर्देश के बाद अब अधिकारियों को उन स्कूलों के चौखट भी लांघने होंगे, जहां इससे पहले कोई अधिकारी झांकने तक नहीं गये हैं. फरकिया के नाम से मशहूर खगड़िया की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि कई स्कूलों तक पहुंचने की जहमत शिक्षा विभाग के अधिकारी जल्दी नहीं उठाना चाहते हैं.
नदिया पार विद्यालय का होगा उद्धार
नदियों के जाल वाले खगड़िया में नदी पार दूर-दराज के कई स्कूल ऐसे हैं, जिनका ताला 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही खुलता है. बाकी दिनों में कागज पर स्कूल की गाड़ी दनादन चलती रहती है. न अधिकारियों को झांकने की फुरसत रहती है और न ही लापरवाह गुरुजी की आदत में सुधार हो रहा है. बताया जाता है कि दियारा सहित नदी पार स्कूलों के दयनीय हालत से वाकिफ रहने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.
