नर्विाचन आयोग ने आरोप गठित करने का दिया था नर्दिेश

निर्वाचन आयोग ने आरोप गठित करने का दिया था निर्देश डीडीसी पर नहीं हुआ आरोप गठितचुनाव अवधि के दौरान भाजपा पर की थी टिप्पणी जांच कमेटी ने डीडीसी को माना था दोषीआरोप गठित नहीं किये जाने से उठ रहे है कई सवालखगड़िया. डीडीसी अब्दुल बहाव अंसारी के विरुद्ध आरोप गठित कर विभागीय कार्रवाई होनी थी. […]

निर्वाचन आयोग ने आरोप गठित करने का दिया था निर्देश डीडीसी पर नहीं हुआ आरोप गठितचुनाव अवधि के दौरान भाजपा पर की थी टिप्पणी जांच कमेटी ने डीडीसी को माना था दोषीआरोप गठित नहीं किये जाने से उठ रहे है कई सवालखगड़िया. डीडीसी अब्दुल बहाव अंसारी के विरुद्ध आरोप गठित कर विभागीय कार्रवाई होनी थी. डीडीसी पर निर्वाचन आयोग ने आरोप गठित करने का निर्देश डीएम सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी को दिया था. आयोग के आदेश के बावजूद डीडीसी पर आरोप प्रपत्र (क) गठित कर राज्य स्तर पर नहीं भेजा गया. इस कारण इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई आरंभ नहीं हो पायी. मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव के दौरान लक्ष्मण रेखा लांंघने (अपनी सीमा) केे आरोप में डीडीसी पर आरोप गठित करने के साथ साथ आठ नवंबर को होने वाली मतगणना से इन्हें अलग रखने का निर्देश जारी किया था. सूत्र के मुताबिक डीडीसी को मतगणना कार्य से तो अलग कर दिया गया, लेकिन अब तक इनके विरुद्ध जिला स्तर से प्रपत्र (क) गठित कर राज्य स्तर पर नहीं भेजा गया. इससे कई सवाल उठने लगे हैं. सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके दबाव में डीडीसी पर आरोप गठित नहीं किया जा रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग ने भाजपा के चुनाव सेल पटना के संयोजक प्रशांत कुमार वर्मा की शिकायत पर डीडीसी के विरुद्ध पहले मामले की जांच करने तथा आरोप सत्य पाये जाने के बाद इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई आरंभ करने के लिए प्रपत्र (क) गठित कर सामान्य प्रशासन विभाग में भेजने का निर्देश जारी किया था. क्या था आरोपविभागीय सूत्र के मुताबिक, डीडीसी श्री अंसारी ने विधानसभा चुनाव अवधि के दौरान भाजपा पर फेसबुक के माध्यम से व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी. इस पर भाजपा चुनाव सेल के प्रदेश संयोजक प्रशांत कुमार वर्मा ने इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से की थी. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने डीएम से रिपोर्ट मांगी थी. सूत्र बताते हैं कि जिला स्तर पर इस पूरे मामले की थ्री मेन जांच कमेटी द्वारा जांच करायी गयी. एडीएम मुनिलाल जमादार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी सियाराम सिंह तथा एनआइसी के डीआइओ अमन पटेल ने संयुक्त रूप से जांच की थी. जांच कमेटी ने अपने रिपोर्ट में यह बातें कहीं थी कि श्री अंसारी डीडीसी होने के साथ-साथ स्वीप के अध्यक्ष भी थे. उन्हें भाजपा पर अपनी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी. डीएम ने भेजी थी रिपोर्ट जांच रिपोर्ट में आरोप सत्य पाये जाने के बाद डीएम सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने चार नवंबर को जांच रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी थी. इस पर आयोग ने डीडीसी पर अनुशासनिक कार्रवाई आरंभ करने के लिए प्रपत्र (क) गठित करने के लिए राज्य स्तर पर भेजने का निर्देश दिया था.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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