मत्रि का काम आना ही मत्रिता को सार्थक बनाता है : महाराज गुरुनंदन

मित्र का काम आना ही मित्रता को सार्थक बनाता है : महाराज गुरुनंदन फोटो है 13 मेंकैप्सन- भागवत कथा के दौरान कृष्ण सुदामा का मिलन दिखाते कलाकार गोगरी. मित्र का काम आना ही मित्रता को सार्थक बनाता है. सच्ची मित्रता वहीं है जो सुख व दुख दोनों में साथ निभाये. उक्त बातें मारवाड़ी धर्मशाला में […]

मित्र का काम आना ही मित्रता को सार्थक बनाता है : महाराज गुरुनंदन फोटो है 13 मेंकैप्सन- भागवत कथा के दौरान कृष्ण सुदामा का मिलन दिखाते कलाकार गोगरी. मित्र का काम आना ही मित्रता को सार्थक बनाता है. सच्ची मित्रता वहीं है जो सुख व दुख दोनों में साथ निभाये. उक्त बातें मारवाड़ी धर्मशाला में चल रहे भागवत कथा के अंतिम दिन कथा वाचक गुरुनंदन जी महाराज ने कहीं. भागवत कथा के दौरान भजन एवं सुदामा श्रीकृष्ण के मिलन की सजीव झांकी को देख श्रद्धालु भावुक हो गये. कथा वाचक ने कहा कि मित्रता में न धर्म का बंधन है न उम्र की सीमा. मित्र के काम आना ही मित्रता को सार्थक करता है. उन्होंने कहा कि हमें कृष्ण सुदामा की मित्रता से प्रेरणा लेनी चाहिए. धर्म, धैर्य, मित्र, स्त्री की विपत्ति में ही परीक्षा होती है. उन्होंने कहा कि भागवत ग्रंथ भगवान का ही स्वरूप है. कथा में राजेश खेतान, प्रवीण जग्नानी, श्रवण मश्कारा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे.

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