52 कोठरी–53 द्वार महल को मिलेगी नई पहचान, पर्यटन नक्शे पर चमकेगा भरतखंड

पुरातात्विक स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी

– उपेक्षित ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को तेज पहल, पुरातात्विक स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी परबत्ता. प्रखंड स्थित भरतखंड का मुगलकालीन ऐतिहासिक “52 कोठरी–53 द्वार” महल अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है. वर्षों से उपेक्षित इस प्राचीन धरोहर को पुरातात्विक स्थल के रूप में विकसित करने की पहल तेज हो गई है. जिला प्रशासन और कला-संस्कृति विभाग इसके संरक्षण और विकास को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं. इसी कड़ी में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी घनश्याम कुमार ने स्वयं स्थल पर पहुंचकर महल का विस्तृत निरीक्षण किया. उन्होंने न सिर्फ किले की संरचना का जायजा लिया, बल्कि इसके निर्माण से जुड़े इतिहास को भी खंगाला. बताया जाता है कि इस भव्य किले का निर्माण राजा बैरम सिंह ने कराया था. पदाधिकारी ने उनके वर्तमान परिजनों से मुलाकात कर महत्वपूर्ण जानकारियां भी जुटाईं. निरीक्षण के दौरान महल के फोटो और वीडियो तैयार किए गए, ताकि इसकी वर्तमान स्थिति का सटीक दस्तावेज तैयार किया जा सके. पूर्व में पुरातत्व विभाग द्वारा विस्तृत प्रतिवेदन की मांग की जा चुकी है और अब जिला प्रशासन इस सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट भेजने की तैयारी में जुटा है. जिलाधिकारी के निर्देश पर चल रही इस पहल का उद्देश्य है कि यहां विस्तृत सर्वेक्षण कर संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं. योजना है कि महल का जीर्णोद्धार कर इसे एक प्रमुख पुरातात्विक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए. अगर यह प्रयास सफल होता है, तो न सिर्फ इस प्राचीन धरोहर को नई जिंदगी मिलेगी, बल्कि खगड़िया जिले को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान भी मिलेगी. स्थानीय लोगों में भी इस पहल को लेकर खासा उत्साह है, क्योंकि इससे क्षेत्र में विकास और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि “52 कोठरी–53 द्वार” महल कब अपनी खोई हुई शान वापस पाता है और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By RAJKISHORE SINGH

RAJKISHORE SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >