कटिहार चैत्र नवरात्र चौथे दिन रविवार को मां दुर्गा की चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना की गई. पूरे विधि विधान के साथ श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के चौथे स्वरूप की पूजा अर्चना कर उन्हें अत्यंत प्रिय व्यंजन का भोग भी लगाए.. सुबह बड़ी दुर्गा मंदिर में महा आरती का आयोजन किया गया. जिसमें बड़ी संख्या में लोग मां के चौथे स्वरूप कुष्मांडा की आरती की. महा आरती के उपरांत मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. मां के चौथे स्वरूप का वर्णन करते हुए बड़ी दुर्गा मंदिर के पुजारी ने बताया कि कुष्मांडा देवी का स्वरूप अत्यंत ही सुंदर और भव्य है. माता की आठ भुजाएं मानी जाती हैं. इन आठ भुजाओं में वो अलग अलग वस्तु उठाए हुए हैं. एक भुजा में कमंडल, एक भुजा में धनुष और बाण, एक में कमल पुष्प, एक में शंख, एक भुजा में चक्र, एक अन्य भुजा में गदा और एक भुजा में सभी सिद्धियों को सिद्ध करने वाली माला है. एक हाथ में मां अमृत कलश भी लिए हुई हैं. मां कुष्मांडा का वाहन सिंह है, मान्यता है कि देवी को कुम्हड़े (कद्दू) की बलि प्रिय है, इस सब्जी को कुष्मांड भी कहते हैं. जिसके आधार पर देवी का नाम भी पड़ गया कुष्मांडा. यह भी माना जाता है कि ब्रह्मांड का निर्माण मां के इस स्वरूप की मुस्कान से हुआ है. इसलिए देवी सूर्यमंडल में ही रहती हैं. केवल उन्हीं में सूरज की तपन को सहन करने की क्षमता है. पुजारी अजय मिश्रा ने बताया कि सोमवार को मां दुर्गा के पांचवें स्वरुप स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाएगी. चैत्र नवरात्र चौथे दिन रविवार को मां दुर्गा की चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना की गई. पूरे विधि विधान के साथ श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के चौथे स्वरूप की पूजा अर्चना कर उन्हें अत्यंत प्रिय व्यंजन का भोग भी लगाए.. सुबह बड़ी दुर्गा मंदिर में महा आरती का आयोजन किया गया. जिसमें बड़ी संख्या में लोग मां के चौथे स्वरूप कुष्मांडा की आरती की. महा आरती के उपरांत मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. मां के चौथे स्वरूप का वर्णन करते हुए बड़ी दुर्गा मंदिर के पुजारी ने बताया कि कुष्मांडा देवी का स्वरूप अत्यंत ही सुंदर और भव्य है. माता की आठ भुजाएं मानी जाती हैं. इन आठ भुजाओं में वो अलग अलग वस्तु उठाए हुए हैं. एक भुजा में कमंडल, एक भुजा में धनुष और बाण, एक में कमल पुष्प, एक में शंख, एक भुजा में चक्र, एक अन्य भुजा में गदा और एक भुजा में सभी सिद्धियों को सिद्ध करने वाली माला है. एक हाथ में मां अमृत कलश भी लिए हुई हैं. मां कुष्मांडा का वाहन सिंह है, मान्यता है कि देवी को कुम्हड़े (कद्दू) की बलि प्रिय है, इस सब्जी को कुष्मांड भी कहते हैं. जिसके आधार पर देवी का नाम भी पड़ गया कुष्मांडा. यह भी माना जाता है कि ब्रह्मांड का निर्माण मां के इस स्वरूप की मुस्कान से हुआ है. इसलिए देवी सूर्यमंडल में ही रहती हैं. केवल उन्हीं में सूरज की तपन को सहन करने की क्षमता है. पुजारी अजय मिश्रा ने बताया कि सोमवार को मां दुर्गा के पांचवें स्वरुप स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाएगी.
चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा को लेकर दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा को लेकर दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
