एनपीएसएस ऐप के उपयोग को लेकर प्रगतिशील किसानों को मिला प्रशिक्षण

जिला कृषि कार्यालय सभागार में मंगलवार को राष्ट्रीय नाशीजीव निगरानी प्रणाली एप एनपीएसएस एप के उपयोग को लेकर प्रगतिशील किसानों को एकदिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया.

मनुष्य पर होने वाले कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से कराया गया अवगत

कटिहार. जिला कृषि कार्यालय सभागार में मंगलवार को राष्ट्रीय नाशीजीव निगरानी प्रणाली एप एनपीएसएस एप के उपयोग को लेकर प्रगतिशील किसानों को एकदिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. भारत सरकार के अधीन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र पटना द्वारा सुदामा ठाकुर, सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण की अध्यक्षता में तथा रश्मि शंकर, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी, संदीप कुमार द्विवेदी, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी एसएन सिंहा, वैज्ञानिक सहायक अंकित कुमार, तकनीकी सहायक की उपस्थिति में प्रशिक्षण दिया गया. एक मार्च को डीएओ मिथिलेश कुमार ने प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को प्रगतिशील किसानों को एनपीएसएस ऐप के प्रशिक्षण में भाग लेने को लेकर एक पत्र जारी किया था. जिसमें बताया गया था कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय नाशीजीव निगरानी प्रणाली आटीफिशियल इंटेलिजेंस एआई आधारित ऐप विकसित किया गया है., वनस्पती संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के आदेश पर सीआइपीएमसी पटना को बिहार के हर जिले में दस प्रगतिशील किसानों को एनपीएसएस ऐप का प्रशिक्षण देकर उनको स्कॉट आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराना है. ताकि वे कीट व्याधी का अच्छी गुणवत्ता युक्त फाेटो इस ऐप में अपलोड कर सकें. इसी को लेकर निर्देश दिया गया था कि संयुक्त कृषि भवन कटिहार के सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपने प्रखंडों से एक एक प्रगतिशील किसान के साथ भाग लें. प्रशिक्षण के दौरान सभी उपस्थित प्रगतिशील किसानों के मोबाइल में एनपीएसएस एप को डाउनलोड भी कराया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनपीएएस एप के उपयोग एवं महत्व, आईपीएम के महत्व एवं आईपीएम के सिद्धांत एवं उसके विभिन्न आयामों के बारे में बताया गया. ट्राईकोडर्मा से बीज उपचार का प्रदर्शन, कीटनाशकों के सुरक्षित एवं संतुलित इस्तेमाल, मनुष्य पर होने वाले कीटनाशकों का दुष्प्रभाव, कीटनाशकों के लेवल एवं कलर कोड, यांत्रिक विधियों जैसे येलो स्टिकी, ब्लू स्टीकी, फेरोमोन ट्रैप, फल मक्खी जाल, लाइट ट्रैप के उपयोग के बारे में और जैविक विधि के इस्तेमाल, मित्र एवं शत्रु कीटों की पहचान, नीम आधारित एवं अन्य वानस्पतिक कीटनाशक के महत्व के बारे में तथा विभिन्न फसलों में लगने वाले कीट, व्याधि की पहचान के बारे में विस्तार से बताया गया. मौके पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी रंजीत कुमार एवं अनुमंडल कृषि पदाधिकारी बरसोई कोशिन अख्तर, प्रखंड कृषि पदाधिकारी भी उपस्थित रहे.

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By Prabhat Khabar News Desk

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