कटिहार जिले के राजकीय डिग्री महाविद्यालय, डंडखोरा में हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती बड़ी श्रद्धा, उत्साह और साहित्यिक गरिमा के साथ मनाई गई. कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. विनय कुमार पांडेय ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर वक्ताओं ने प्रेमचंद की कृतियों, उनके विचारों और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला.
"100 साल बाद भी समाज की राह दिखाता है प्रेमचंद का साहित्य"
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी प्राचार्य प्रो. विनय कुमार पांडेय ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल एक कथाकार या उपन्यासकार नहीं थे, बल्कि वे अपने दौर के समाज का एक सच्चा दर्पण थे.
"प्रेमचंद के कालजयी उपन्यास 'गोदान' में भारतीय ग्रामीण समाज की गरीबी, महाजनी शोषण, कर्ज का दुचक्र और मानवीय संवेदनाओं का जो सजीव चित्रण किया गया है, वह लगभग 100 साल बाद भी हमारे दौर पर पूरी तरह लागू होता है. सच्चा साहित्य वही है जो शोषित और आम आदमी के दुख-दर्द को आवाज दे."
'प्रेमचंद के साहित्य में सामाजिक चेतना' पर शोध पत्र
समारोह के मुख्य वक्ता और हिंदी विभाग के प्रो. जीतेंद्र वर्मा ने 'प्रेमचंद के साहित्य में सामाजिक चेतना' विषय पर अपना विस्तृत शोध निबंध प्रस्तुत किया.
उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के पास एक दूरदर्शी सोच (Vision) थी. उन्होंने केवल मनोरंजन के लिए कहानियां नहीं लिखीं, बल्कि समाज सुधार का एक ठोस एजेंडा रखा:
- शोषण के खिलाफ आवाज: कफन, पूस की रात, ठाकुर का कुआं और सवा सेर गेहूं जैसी कालजयी कहानियों के माध्यम से उन्होंने जातिवाद, गरीबी और सामंती व्यवस्था पर करारा प्रहार किया.
- वर्तमान प्रासंगिकता: आज के दौर में जब किसान संकट, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दे पुनः गंभीर रूप धारण कर रहे हैं, तब प्रेमचंद की रचनाओं को गहराई से पढ़ना और समझना और भी आवश्यक हो गया है.
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां व गणमान्य लोगों की मौजूदगी
साहित्यिक परिचर्चा के साथ-साथ कार्यक्रम में प्रेरणादायक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं. सौरिया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेश कुमार, शिक्षक प्रभाकर कुमार और श्याम नंद केवट ने भी विचार व्यक्त करते हुए प्रेमचंद के जीवन संघर्षों और उनके अमूल्य साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया.
इस जयंती समारोह में महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और स्थानीय साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे.
