कुरसेला. आम के पेड़ों पर मंजर की खुशबू से बगान मालिकों में हर्ष है. अन्य वर्षों के अपेक्षा इस साल आम के अधिक फल लगने की उम्मीद जतायी जा रही है. बगान मालिक पेड़ों में लगे आम के मंजरों के बचाव के जतन में जुट गये है. आम के तनों का पोषण कीटनाशी दवाओं का छिड़काव किया जाने लगा है. समझा जाता है कि प्राकृतिक आपदा, आंधी, बारिश से बचाव होने से इस साल पेड़ों पर अधिक मात्रा में आम के फल लग सकते हैं. अधिक संख्या में पेड़ों पर फल लगने से बगान मालिकों को आर्थिक रूप से इसका लाभ मिलने की आस है. आम बगानों की खरीददारी करने वाले व्यवसायी पेड़ों में लगे मंजरों के आधार पर कीमत तय कर खरीददारी करेंगे. बताया जाता है कि व्यवसायी आम बगानों का अवलोकन करने लगे हैं. क्षेत्र में आम के कई बगान है. बगानों के अलावा इधर उधर छिटफुट आम फलों के पेड़ है. औसतन पेड़ों पर आम फलों का अधिक मंजर देखा जा रहा है. माना जाता है कि पेड़ों में अधिक फल लगने से बाजार में आम फलों के भाव के कम रहने की उम्मीद होती है. कीमतें कम होने से आम संधारण आम फलों की खरीददारी करने में सक्षम हो पाते हैं. बगान मालिकों का कहना था कि इस वर्ष आम पेड़ में थोड़ा विलंब से मंजरी आया है. बावजूद मंजर अधिक है. बताया गया कि मालदह, जर्दालू, बिज्जू, लेंगड़ा, चौसा, आम्रपाली आदि पेड़ों में अधिक संख्या में मंजर आया है. संभावना जतायी जा रहा है कि इस साल आंधी, तूफान, का अधिक प्रकोप हो सकता है. ऐसा देखा गया है कि जिस साल आम के पेड़ों में अधिक फल आता है. उस वर्ष आंधी तूफान का प्राकृतिक कुप्रकोप अधिक होता है. आपदा के मार से पेड़ों में फलों की संख्या घट कर रह जाती है.
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