देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर कटिहार जिले में स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानियों को श्रद्धापूर्वक याद किया जा रहा है. समेली प्रखंड के डूमर गांव में 8 सितंबर 1908 को जन्मे महान स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय नथुनी प्रसाद सिन्हा का नाम जिले के उन अग्रणी रणबांकुरों में शामिल है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. महात्मा गांधी की प्रत्यक्ष सेवा से लेकर नमक सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन और विभाजन के समय शरणार्थियों की सेवा में उनका योगदान अतुलनीय रहा.
पढ़ाई छोड़ स्वाधीनता आंदोलन में कूदे, कटिहार में की गांधी जी की सेवा
डूमर के बरहन्डी घाट के पास अंग्रेजों की क्रूर 'नीलहा कोठी' के आतंक के खिलाफ नथुनी प्रसाद सिन्हा ने युवाओं को एकजुट करना शुरू किया:
- गांधी जी की सेवा का अवसर: वर्ष 1925-26 में जब महात्मा गांधी कटिहार आए और अस्वस्थ हो गए, तब नथुनी जी को उनकी तीमारदारी व सेवा करने का सौभाग्य मिला.
- लाहौर अधिवेशन व नमक सत्याग्रह: राष्ट्रसेवा की धुन में पढ़ाई छोड़कर वे 1930 में लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में शामिल हुए और इसके बाद नमक आंदोलन में सक्रिय रूप से कूद पड़े.
- सीमांचल में संगठन विस्तार: उन्होंने पूर्णिया, अररिया, फारबिसगंज, किशनगंज, बिहपुर और टीकापट्टी में भोला पासवान शास्त्री, बैद्यनाथ चौधरी और लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु' जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर आंदोलन का नेतृत्व किया.
बिहपुर सम्मेलन: डॉ. राजेंद्र प्रसाद पर बरसीं लाठियां अपने ऊपर झेलीं
वर्ष 1930 में बिहपुर में आयोजित सम्मेलन के दौरान जब देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभा को संबोधित कर रहे थे, तभी अंग्रेजी सिपाहियों ने बर्बर लाठीचार्ज कर दिया:
- राजेंद्र बाबू को लाठियों के वार से बचाने के लिए नथुनी प्रसाद सिन्हा उनके आगे ढाल बनकर खड़े हो गए.
- इस दौरान उनके शरीर पर 20 से 25 लाठियां लगीं और वे लहूलुहान होकर जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे.
- स्वस्थ होने के बाद वे दोबारा आंदोलन में सक्रिय हुए और 1942 के आंदोलन के समय नेपाल में अज्ञातवास में रहकर भूमिगत रूप से क्रांति का संचालन करते रहे.
मानवीय सेवा और देश के शीर्ष सम्मान
नथुनी बाबू ने न केवल जंग-ए-आजादी लड़ी, बल्कि विभाजन के समय सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने और बर्मा (म्यांमार) से आए बेसहारा शरणार्थियों के पुनर्वास व सेवा में ऐतिहासिक कार्य किया.
- प्रतिष्ठित सम्मान: तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी द्वारा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ताम्रपत्र व सम्मान प्रदान किया गया.
- प्रशासनिक व स्थानीय सम्मान: तत्कालीन पूर्णिया प्रमंडलीय आयुक्त अमिता पाल और कटिहार की तत्कालीन डीएम हरजोत कौर द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया था.
- अमर स्मृति: 21 दिसंबर 2001 को 94 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ. उनके सम्मान में कटिहार नगर निगम ने दुर्गापुर स्थित एक प्रमुख मार्ग का नाम 'नथुनी प्रसाद सिन्हा पथ' रखा है.
