कटिहार. जिले के सरदाही स्थित एक निजी स्कूल में सोमवार को सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से मानव तस्करी और युवाओं के शोषण के संभावित खतरों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. अभिलाषा परिवार स्वयंसेवी संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क, फेक प्रोफाइल, ऑनलाइन ग्रूमिंग, ब्लैकमेलिंग और साइबर ठगी से बचने के उपायों की जानकारी दी गई.
कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं से सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने की अपील की. साथ ही निजी जानकारी और तस्वीरें अनजान लोगों के साथ साझा नहीं करने तथा किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर समय रहते शिकायत करने की सलाह दी गई.
फेक प्रोफाइल के जरिए भरोसा जीतने की कोशिश से रहें सतर्क
अभिलाषा परिवार स्वयंसेवी संस्था के सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफार्म का इस्तेमाल कुछ अपराधी युवाओं को अपने जाल में फंसाने के लिए कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि फेक प्रोफाइल और ग्रूमिंग के जरिए पहले भरोसा कायम करने की कोशिश की जाती है.
उन्होंने कहा कि प्यार, शादी, मॉडलिंग, एक्टिंग और करियर से जुड़े आकर्षक प्रस्ताव देकर युवाओं को संपर्क में लाने के बाद उन्हें ब्लैकमेल या शोषण का शिकार बनाने का खतरा रहता है. उन्होंने विशेष रूप से मानसिक दबाव से गुजर रहे या पारिवारिक सहयोग की कमी महसूस करने वाले युवाओं को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी.
प्यार और करियर के नाम पर आने वाले ऑफर की करें जांच
जागरूकता कार्यक्रम में युवाओं को बताया गया कि सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति से लगातार बातचीत होने के बाद मिलने वाले ऑफर पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए. खासकर नौकरी, मॉडलिंग, एक्टिंग, शादी या कम समय में अधिक पैसा कमाने से जुड़े प्रस्तावों की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है.
वक्ताओं ने छात्रों से कहा कि ऑनलाइन पहचान हमेशा वास्तविक नहीं होती. किसी व्यक्ति की प्रोफाइल, तस्वीर या बातचीत के आधार पर उसकी पहचान और मंशा को सही मान लेना जोखिम भरा हो सकता है. इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचना चाहिए.
साइबर ठगी होने पर 1930 पर शिकायत की जानकारी
कार्यक्रम में युवाओं को साइबर ठगी की स्थिति में टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 के बारे में जानकारी दी गई. वक्ताओं ने बताया कि साइबर अपराध का शिकार होने पर जल्द से जल्द शिकायत करना महत्वपूर्ण है. बच्चों से जुड़े मामलों के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी छात्रों को बताया गया. कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि किसी बच्चे या किशोर के साथ ऑनलाइन या ऑफलाइन शोषण से जुड़ी स्थिति सामने आने पर भरोसेमंद अभिभावक या संबंधित हेल्पलाइन से संपर्क किया जाना चाहिए.
रातों-रात अमीर बनने की चाहत को बताया जोखिम
कर्तव्य वेलफेयर आर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष अरुण कुमार चौबे ने कहा कि जल्दी पैसा कमाने और रातों-रात अमीर बनने की चाहत युवाओं को गलत लोगों के संपर्क में ला सकती है. उन्होंने कहा कि कई बार जब तक परिवार या आसपास के लोगों को किसी परेशानी की जानकारी मिलती है, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है.
उन्होंने युवाओं को अपनी समस्याओं और ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में माता-पिता या भरोसेमंद लोगों से बात करने की सलाह दी. उनका कहना था कि किसी परेशानी को अकेले छिपाने के बजाय समय रहते परिवार या विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करना सुरक्षित विकल्प हो सकता है.
अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करने की सलाह
छात्र-छात्राओं को सोशल मीडिया सुरक्षा के कई व्यावहारिक उपाय भी बताए गए. उन्हें अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करने, निजी जानकारी, फोटो और फोन नंबर साझा नहीं करने की सलाह दी गई.
वक्ताओं ने यह भी कहा कि संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अनजान व्यक्ति से निजी चैट में संवेदनशील जानकारी साझा करने और ऑनलाइन पहचान के आधार पर भरोसा करने से बचना चाहिए. किसी तरह का दबाव, धमकी या ब्लैकमेल सामने आने पर चुप रहने के बजाय तत्काल परिवार और संबंधित सहायता तंत्र को जानकारी देने की सलाह दी गई.
ग्रुप डिस्कशन में छात्रों ने साझा किए अनुभव और सवाल
कार्यक्रम में विद्यालय के निदेशक राजकुमार गुप्ता, प्रिंसिपल हेमा कुमारी, वाइस प्रिंसिपल जितेंद्र कुमार दास, शिक्षक पूजा झा, अनीश कुमार, कोमल कुमारी, सुमित कुमार और शिवांशु कुमार सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं मौजूद रहे. कार्यक्रम के अंत में छात्रों के साथ ग्रुप डिस्कशन किया गया. इस दौरान ऑनलाइन सुरक्षा, सोशल मीडिया के इस्तेमाल और संदिग्ध संपर्क से बचने को लेकर छात्रों से फीडबैक लिया गया. छात्रों ने भी अपनी जिज्ञासाएं और सवाल सामने रखे. जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को डराना नहीं, बल्कि उन्हें ऑनलाइन दुनिया में मौजूद जोखिमों को पहचानने और किसी संदिग्ध स्थिति में समय रहते मदद लेने के लिए तैयार करना रहा. विशेषज्ञों और संस्था के प्रतिनिधियों ने युवाओं से सतर्क, जागरूक और जिम्मेदार तरीके से डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने की अपील की.
