कैमूर: आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया, महंगाई की मार से बिगड़ा घर का बजट, प्याज-लहसुन ने बिगाड़ा रसोई का जायका

बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। 12 हजार के बजाय अब 15 हजार रुपये में भी घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। जानें क्या है पूरी स्थिति।

Kaimur News : जिले में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम परिवारों के घरेलू बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है. खाद्य सामग्री, सब्जी, दूध, तेल, दाल और रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की कीमत बढ़ने से सीमित आमदनी वाले परिवारों के सामने घर चलाने की चुनौती बढ़ गयी है. लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले तक 12 हजार रुपये में महीने का सामान्य घरेलू खर्च किसी तरह संभल जाता था, लेकिन अब करीब 15 हजार रुपये खर्च करने के बाद भी कई जरूरी जरूरतें अधूरी रह जाती हैं.

राशन खरीदते ही खत्म हो जाता है बजट का बड़ा हिस्सा

महंगाई का सबसे अधिक असर निम्न और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है. महीने की शुरुआत में राशन खरीदने के बाद ही घरेलू बजट का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाता है. इसके बाद सब्जी, दूध, बच्चों की पढ़ाई, बिजली बिल, दवा और आवागमन जैसे खर्च अलग से जुड़ जाते हैं. अचानक कोई अतिरिक्त खर्च सामने आने पर लोगों को उधार लेने तक की नौबत आ रही है.

गृहिणियों के लिए रसोई संभालना बनी चुनौती

शहर की रहने वाली निर्मला देवी, प्रतिभा भारती आदि ने बताया कि हर सप्ताह बाजार से सामान खरीदने पर पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च हो रही है. घर का बजट संतुलित करने के लिए कई बार खाने-पीने की चीजों में भी कटौती करनी पड़ती है. गृहिणी रेखा देवी ने कहा कि पहले महीने का राशन और सब्जी करीब 12 हजार रुपये में निकल जाता था, लेकिन अब वही सामान खरीदने में करीब 15 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं. बच्चों की पढ़ाई और दवा का खर्च जोड़ने पर बजट पूरी तरह बिगड़ जाता है.

प्याज-लहसुन ने रसोई का जायका बिगाड़ा

इधर, कीमतों में बढ़ोतरी के कारण प्याज और लहसुन भी लोगों की रसोई से दूर होने लगे हैं. जिले के बाजारों में प्याज की कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गयी है. अन्य सब्जियों के दाम भी बढ़े हुए हैं. बाजार में एक-दो सब्जियों को छोड़कर अधिकांश सब्जियां 40 रुपये प्रति किलो से कम नहीं मिल रही हैं. दाल और तेल की महंगाई ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है.

दुकानदारों पर भी पड़ रहा बिक्री का असर

दुकानदारों का कहना है कि खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से ग्राहकों की खरीदारी क्षमता प्रभावित हुई है. लोग पहले की तरह एक साथ अधिक सामान नहीं खरीद रहे हैं, बल्कि जरूरत के हिसाब से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सामान ले रहे हैं. स्थानीय दुकानदार राजेश कुमार ने बताया कि कई ग्राहक महीने के अंत में उधार सामान मांगते हैं. महंगाई का असर दुकानदारों के कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है.

लोगों ने बाजार में कीमतों की नियमित निगरानी की मांग की

लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों पर प्रशासन को नियमित निगरानी करनी चाहिए. उनका आरोप है कि जांच की कमी के कारण थोक कारोबारी समय-समय पर अलग-अलग खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ा देते हैं. इससे खुदरा दुकानदारों और ग्राहकों दोनों पर असर पड़ता है. लोगों ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए नियमित जांच की मांग की है.

आमदनी वहीं, बढ़ता जा रहा खर्च

लोगों के अनुसार, महंगाई जिस अनुपात में बढ़ रही है, उस अनुपात में आमदनी नहीं बढ़ी है. नौकरी या छोटे कारोबार से होने वाली आय लगभग उतनी ही है, जबकि घरेलू खर्च लगातार बढ़ रहा है. वार्ड संख्या 10 निवासी संजय चौधरी ने बताया कि वेतन मिलते ही राशन, बच्चों की फीस, बिजली बिल और अन्य जरूरी खर्च में बड़ी रकम चली जाती है. महीने के अंत तक पैसे की कमी हो जाती है और पहले की तरह बचत करना संभव नहीं रह गया है.

वार्ड संख्या 16 निवासी अजय सिंह ने कहा कि घर चलाने की जिम्मेदारी में सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है. हर सामान का हिसाब रखना पड़ता है. पहले जितने पैसे में एक सप्ताह का सामान आ जाता था, अब उतने में कुछ जरूरी सामान ही मिल पाता है.

हर महीने उधार लेकर घर चलाने की मजबूरी

बढ़ते घरेलू खर्च का असर परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रहा है. कई परिवार किराना दुकानदारों से उधार सामान ले रहे हैं, जबकि बीमारी या बच्चों की पढ़ाई जैसे अतिरिक्त खर्च के लिए परिचितों से कर्ज लेने की नौबत आ रही है. लोगों का कहना है कि एक बार उधार शुरू होने के बाद उसे चुकाना भी मुश्किल हो जाता है.

12 हजार से बढ़कर 15 हजार हुआ घरेलू बजट

खर्च का मदपहलेअब
राशन व किराना4,0005,000
सब्जी व फल1,5002,000
दूध व खाद्य सामग्री1,2001,500
बच्चों की पढ़ाई व स्कूल सामग्री1,5001,800
बिजली, गैस व अन्य बिल1,3001,500
आवागमन व अन्य खर्च1,5002,200
दवा व आकस्मिक खर्च1,0001,000
कुल12,00015,000

यानी करीब 3 हजार रुपये की अतिरिक्त मासिक मार ने आम परिवारों की बचत पर सीधा असर डाला है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अमित कुमार

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >