डीडीसी की सख्ती से मचा हड़कंप, मनरेगा मेठ पर एफआइआर दर्ज

उप विकास आयुक्त के कड़े तेवर से फोटो से फोटो कैप्चरिंग कर अवैध भुगतान का खुलासा

प्रभात खबर की खबर का असर, 23 मजदूरों के फर्जी भुगतान का मामला मेठ फुल कुमारी देवी के खिलाफ मामला दर्ज, भ्रष्टाचारियों में हड़कंप उप विकास आयुक्त के कड़े तेवर से फोटो से फोटो कैप्चरिंग कर अवैध भुगतान का खुलासा # प्रभात इम्पैक्ट # मोहनिया सदर. उप विकास आयुक्त (डीडीसी) दिव्या शक्ति की सख्ती से मनरेगा में गड़बड़ी कर सरकारी राशि का बंदरबांट करने वालों में हड़कंप मच गया है. भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वालों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं व उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसकने लगी है. अधौरा प्रखंड की सड़की पंचायत में ”फोटो से फोटो कैप्चरिंग” कर 23 मजदूरों को अवैध भुगतान किये जाने के मामले में डीडीसी का कड़ा रुख देख पंचायत रोजगार सेवक (पीआरएस) के पसीने छूट गये. इसके बाद पीआरएस राकेश कुमार ने कर्मा गांव की निवासी मेठ फुल कुमारी देवी के खिलाफ स्थानीय थाने में कांड संख्या 10/2026 दर्ज कराया है. पुलिस ने उक्त मेठ के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत गंभीर मामला दर्ज किया है, जिसमें पुलिस किसी भी समय गिरफ्तारी कर सकती है. आवेदन के अनुसार, 23 मजदूरों को 5,750$ रुपये की दैनिक मजदूरी का गलत भुगतान मेठ द्वारा कराया गया है. प्रभात खबर ने किया था मामले को उजागर गत 03 फरवरी को ”प्रभात खबर” ने भीषण ठंड में बनियान पहन कर काम करते दिखे श्रमिक, जमीन में गर्मी वाली दरारें शीर्षक से इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था. इसमें दिखाया गया था कि चुमुरुका गांव में एक बांध निर्माण कार्य के दौरान तीन मास्टर रोल में 23 मजदूरों की उपस्थिति फर्जी तरीके से दर्ज की गयी थी. फोटो से फोटो कैप्चरिंग कर भुगतान किये जाने का मामला जांच में सही पाया गया, जिसके आलोक में डीडीसी ने पीआरएस से स्पष्टीकरण मांगते हुए मेठ पर प्राथमिकी का आदेश दिया था. सिर्फ मेठ पर ही एफआईआर क्यों? इस मामले में एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ”बड़ी मछली” को बचाने के लिए ”छोटी मछली” को निशाना बनाया गया है? मेठ ने साइट पर पुराना फोटो अपलोड किया, तो उस पर प्राथमिकी हो गयी, लेकिन मास्टर रोल की जांच व राशि भुगतान की प्रक्रिया में पीआरएस व पीओ (कार्यक्रम पदाधिकारी) की भी अहम भूमिका होती है. मनरेगा आयुक्त के पत्रानुसार, फोटो की जांच प्रखंड व जिला स्तर पर होनी अनिवार्य है. यदि इन जिम्मेदार अधिकारियों ने ईमानदारी से अपनी जवाबदेही निभायी होती, तो सरकारी राशि का अवैध भुगतान नहीं होता. ऐसे में भ्रष्टाचार में संलिप्त अन्य लोगों पर भी कार्रवायी किया जाना न्यायहित में आवश्यक प्रतीत होता है.

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By VIKASH KUMAR

VIKASH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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