भभुआ (नगर) : सोमवार को राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन रसोइया फ्रंट के राष्ट्रीय महासचिव जुल्फेकार अली के नेतृत्व में मध्याह्न भोजन योजना के तहत कार्यरत रसोइये ने रैली, धरना व प्रदर्शन किया.
रैली में रसोइया अपने हाथों में छोलनी, छनवटा व बेलन लेकर नारे लगा रहे थे. एक हजार में दम नहीं, छह हजार से कम नहीं. रैली की शुरुआत शहर के जगजीवन स्टेडियम से की गयी, जो सदर अस्पताल, एकता चौक व कैमूर स्तंभ होते हुए समाहरणालय पहुंच कर सभा में तब्दील हो गयी.
रसोइयों की स्थिति बंधुआ मजदूर से भी बदतर : समाहरणालय गेट पर रसोइया फ्रंट द्वारा आयोजित धरने को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि वर्तमान समय में रसोइये की स्थिति बंधुआमजदूर से भी बदतर हो गयी है. न तो इन्हें काम की सुरक्षा है और न ही जिने लायक पारिश्रमिक का भुगतान किया जा रहा है.
रसोइयों को मनमाने ढंग से विद्यालयों में रखा जाता है और जब चाहे तब हटा दिया जाता है. सरकार द्वारा अनजाने में इन रसोइयों का आर्थिक, सामाजिक व मानसिक शोषण किया जा रहा है. फुलटाइम ड्यूटी करा कर लगभग 35 रुपये दैनिक मजदूरी देना आर्थिक शोषण है.
मुखिया व प्रधानाध्यापक द्वारा हर बार यह कर डराया जाता है कि जब चाहे तुम्हें हटा दिया जायेगा. वहीं, शारीरिक क्षमता से अधिक कार्य कराया जा रहा है.
एमडीएम योजना में नियुक्त की गयी रसोइये ज्यादातर महिलाएं हैं, जो अत्यंत गरीब है. इनको कानूनी संरक्षण भी नहीं दिया जायेगा, तब तक इनका शोषण बंद नहीं होगा.
प्रदेश अध्यक्ष सुनैना मांझी ने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को गरीमा पूर्वक जीने का अधिकार है. काम के बदले उचित मजदूरी भुगतान करना सरकार की बाध्यता होनी चाहिए. उन्होंने रसोइयों का मानदेय हर माह छह हजार उनके निजी खाते में भुगतान करने की मांग की. वहीं, प्रदेश संयोजक राम परिखा पासवान ने कहा कि राज्य सरकार के अलावा केंद्र की मोदी सरकार एमडीएम योजना को एनजीओ को देने षड्यंत्र रच रही है. इसका संगठन जोरदार विरोध करेगा. इसके लिए आगामी 10 मार्च को दिल्ली के जंतर मंतर पर संगठन द्वारा धरना प्रदर्शन व घेराव किया जायेगा. उन्होंने सभी रसोइये से एकजुट होकर इसमें भाग लेने की अपील की.
धरने को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया, जिनमें राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी स्टील बॉडी, राष्ट्रीय संयोजक चमेली सिंह, गनौरी राम, सालेहा बीबी, मराछी देवी, प्रेमा देवी, फुल कुंवर आदि रहे.
रसोइयों ने डीएम का किया घेराव : रसोइये की रैली जब समाहरणालय गेट पर पहुंची, तो वहां रसोइये द्वारा समाहरणालय के मुख्य गेट को जाम कर नारेबाजी की जाने लगी. सुरक्षा व्यवस्था में लगे जवानों ने मुख्य गेट को बंद कर दिया.
इस दौरान जब जिलाधिकारी राजेश्वर प्रसाद सिंह की गाड़ी समाहरणालय से निकली, तो रसोइये ने डीएम की गाड़ी को भी बाहर नहीं निकलने दिया. इसके बाद डीएम को वापस अपने कार्यालय लौटना पड़ा. इसके बाद रसोइयों का एक प्रतिनिधिमंडल डीएम से मिलने पहुंचा और उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा. डीएम ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि आपकी बात सरकार तक पहुंचायी जायेगी.
