दोपहर तक बंद रहे बाजार, दुकानदारों से मारपीट भी

भभुआ (सदर) : सिकठी गांव में सतवंत पटेल उर्फ नेपाली की हत्या के विरोध में जहां एक तरफ भभुआ बाजार दोपहर तक बंद व जाम के कारण आवागमन ठप रहा. वहीं सिकठी गांव में हत्या के आरोपितों को आक्रोशित लोगों से बचाने में पुलिस प्रशासन को लोहे के चने चबाने पड़े. सिकठी गांव में ग्रामीणों […]

भभुआ (सदर) : सिकठी गांव में सतवंत पटेल उर्फ नेपाली की हत्या के विरोध में जहां एक तरफ भभुआ बाजार दोपहर तक बंद व जाम के कारण आवागमन ठप रहा. वहीं सिकठी गांव में हत्या के आरोपितों को आक्रोशित लोगों से बचाने में पुलिस प्रशासन को लोहे के चने चबाने पड़े.
सिकठी गांव में ग्रामीणों का आक्रोश इतना अधिक था कि वह हत्यारों को उन्हें सौंपने के अलावा डीएम, एसपी व जनप्रतिनिधियों की कोई बात सुनने के लिए तैयार नहीं थे. हत्या की सूचना के बाद महज चार पुलिस के जवानों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे भभुआ थानेदार अविनाश कुमार को हत्या के आरोपितों को ग्रामीणों के आक्रोश से बचाने में काफी जदोजहद झेलनी पड़ी. सैकड़ों ग्रामीण के आगे महज चार पुलिस के जवान बौने साबित हो रहे थे.
आक्रोशित ग्रामीण पश्चिम पोखरा पर कासीम के घर में हत्या के बाद छिपे मुख्य आरोपित जसीमुद्दीन व उसके साथियों को मारने पर आमादा थे. वहीं हत्या के आरोपितों को ग्रामोणों के आक्रोश से बचाने में जुटे भभुआ थानेदार को काफी मशक्कत झेलनी पड़ी. हालात बिगड़ते देख थानेदार ने भी अपने पिस्टल को निकाल लिया और स्थिति से निपटने के लिए ग्रामीणों व हत्यारों के बीच में खड़े हो गये. घटना व स्थिति को बिगड़ने की सूचना पाकर आनन-फानन में डीएम व एसपी के पहुंचने के बाद वहां मौजूद थानेदार व चार पुलिस कर्मियों को थोड़ा बल मिला. हालांकि इस बीच ग्रामीणों ने कासीम पूरब खेत में रखे पुआल को आग के हवाले कर दिया था.
हर रास्ते को किया बंद : डीएम, एसपी व बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के पहुंचने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों को एक समय ऐसा लगा कि पुलिस जबरन आरोपितों को गांव से निकाल ले जायेगी. इससे पहले ग्रामीणों ने गांव से निकलने वाले हर रास्ते पर ट्रैक्टर लगा कर रास्ते को बंद कर दिया. चारों तरफ आक्रोशित ग्रामीणों से घिरी पुलिस को यह समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से हत्या के आरोपितों को उनके चंगुल से बचा कर थाने ले आये.
डीएम व एसपी ने कई बार माइक के माध्यम से ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी जिद पर अड़े रहे. प्रशासन ग्रामीणों को समझाने में पूर्व विधायक डॉ प्रमोद सिंह, चंद्रप्रकाश आर्य व लल्लू पटेल को बुलवाया. लेकिन ग्रामीण इनकी भी बातों को अनसुना कर अपनी मांग पर अड़े रहे.
हथियार मिलने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश हुआ कम : आक्रोशित ग्रामीण बार-बार पुलिस से यह कह रहे थे कि छिपे हुए हत्यारों के पास हथियारों का जखीरा है. हत्या के बाद जब ग्रामीणों ने हत्यारों को घेरा था, तो वे घिरे हुए काशीम के घर के छत से हथियार दिखाये और घर में घुसने पर गोली मार देने की धमकी दे रहे थे.
लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद जब डीएम व एसपी ने हत्यारों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर स्पीडी ट्रायल कराने का आश्वासन दिया, तो ग्रामीणों ने घर की तलाशी ले हथियारों को जब्त करने की मांग करने लगे. तालाशी की मांग पर एसपी ने तत्काल घर व उसके आसपास के खेत खलिहानों का बारीकी से तलाशी अभियान शुरू कराया.
जब सैकड़ों पुलिस कर्मियों ने घर व घर के बाहर पुआल के ढेर में बारीकी से तलाशी शुरू की तो लगभग 10-10 मिनट के अंतराल पर तीन कट्टा व एक देसी रायफल सहित नौ कारतूस मिले. उसमें वह हथियार भी मिला, जिसमें जसीमुद्दीन पर नेपाली को गोली मारने का आरोप था.

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