भभुआ (नगर) : मैट्रिक की परीक्षा को कदाचारमुक्त संपन्न कराये जाने को लेकर इस बार शिक्षा विभाग द्वारा सेंटअप परीक्षा के बाद स्कूलों में नियमित रूप से क्लासेज चलाने का फरमान जारी किया है. लेकिन, धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है. कई विद्यालयों में स्पेशल क्लासेज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, तो कहीं स्पेशल क्लास का संचालन हो ही नहीं रहा.
मिली जानकारी के अनुसार, सेंटअप परीक्षा के बाद बच्चों ने स्कूल आना ही छोड़ दिया है. वे अपना कोर्स निजी कोचिंग सेंटरों के सहारे पूरा कर रहे हैं. वहीं परीक्षा में बैठनेवाले कई परीक्षार्थियों का कहना है की परीक्षा सिर पर है विद्यालय में पढ़ाई के नाम पर औपचारिकता निभायी जा रही है.
परीक्षा अच्छे अंको से पास करना चुनौती है. महंगाई के कारण कोचिंग करना आसान नहीं फिर भी कोचिंग कर रहे हैं. वहीं अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों को कमी ज्यों की त्यों बनी हुई है. बच्चे भी ऐसी परिस्थिति में स्कूल जाने से हिचक रहे हैं. बच्चों को कोचिंग कराना मजबूरी है. अभिभावकों की जेब पर कोचिंग का खर्च भारी पड़ रहा है.
जिले के कई विद्यालयों की स्थिति यह है कि स्टूडेंट्स के अनुपात में शिक्षक मौजूद नहीं. जिला शिक्षा पदाधिकारी सत्यनारायण प्रसाद ने बताया कि कई विद्यालयों में विशेष कक्षाओं का संचालन नहीं हो रहा. अब लगातार स्कूलों का निरीक्षण किया जायेगा. जिन विद्यालयों में विशेष कक्षा का संचालन नहीं हो रहा उन विद्यालयों के हेडमास्टरों पर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिख जायेगा.
सभी एचएम को यह निर्देश दिया गया है कि बच्चों व अभिभावकों से बात कर स्कूलों में विशेष कक्षाओं के संचालन के लिए बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करे. इस मामले में कोई भी बहानेबाजी नहीं चलेगी. गौरतलब है कि माध्यमिक परीक्षा 2016 में इस बार जिले में कुल 25839छात्र छात्राएं शामिल होंगे. इनमें 13245 छात्र व 12564 छात्राएं हैं
